Sasu Maa ki chudai Sali ki shadi me

शादी का मौसम था। घर में हलचल मची हुई थी। मेरी साली रिया की शादी होने वाली थी। पूरा परिवार जुटा हुआ था। मैं, राहुल, अपनी पत्नी नेहा के साथ यहां आया था। नेहा व्यस्त थी तैयारियों में, लेकिन मेरी नजरें बार-बार अपनी सासु मां, कमला देवी पर पड़ रही थीं। कमला देवी, 45 साल की विधवा, लेकिन उनका शरीर अभी भी जवां लगता था। उनकी गांड भरी हुई, चूचियां मोटी और गोल, और चेहरा हमेशा मुस्कुराता रहता। शादी की भागदौड़ में वे साड़ी पहने घूम रही थीं, जिससे उनकी कमर की लचक और कूल्हों की थिरकन साफ दिख रही थी।

मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन मैं अपनी सासु मां को इस नजर से देखूंगा। लेकिन पिछले कुछ महीनों से कुछ तो बदल गया था। नेहा के साथ मेरी सेक्स लाइफ ठीक थी, लेकिन कमला देवी की मौजूदगी हमेशा मुझे उत्तेजित कर देती। कभी उनकी साड़ी की चुन्नी सरक जाती, कभी नहाने के बाद गीले बालों से उनकी गर्दन चमकती। मैं चुपके से उन्हें घूरता रहता। और आज, शादी के दिन, यह उत्तेजना चरम पर पहुंच गई।

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शादी की रस्में चल रही थीं। बारात आई, जयमाला हुआ। रिया दुल्हन बनी खड़ी थी, लेकिन मेरी आंखें कमला देवी पर टिकी थीं। वे मेहमानों को संभाल रही थीं, हंस-हंसकर बातें कर रही थीं। शाम ढलते-ढलते डिनर का समय हो गया। घर के आंगन में टेंट लगे थे, लोग खा-पी रहे थे। नेहा रिया के साथ व्यस्त थी, और मैं अकेला घूम रहा था। तभी कमला देवी ने मुझे बुलाया, ‘राहुल बेटा, अंदर आओ, कुछ सामान उठा लो।’

मैं उनके पीछे-पीछे अंदर चला गया। घर का पीछे का हिस्सा खाली था। वे किचन में गईं, और मैंने दरवाजा बंद कर लिया। ‘क्या हुआ सासु मां?’ मैंने पूछा। वे मुड़ीं, उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया, ब्लाउज से उनकी गहरी दरार दिखी। ‘बस, थक गई हूं बेटा। इतना काम।’ उनकी आवाज में थकान थी, लेकिन आंखों में कुछ चमक। मैं पास गया, उनका कंधा छुआ। ‘आराम कर लीजिए।’

अचानक, वे मेरी ओर मुड़ीं। हमारी नजरें मिलीं। कुछ पल की खामोशी। फिर, मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। ‘सासु मां, आप कितनी सुंदर लग रही हैं आज।’ मेरे शब्दों से वे शरमा गईं, लेकिन पीछे नहीं हटीं। ‘बेटा, ऐसी बातें…’ लेकिन उनकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया। मेरे होंठ उनके होंठों पर चिपक गए। वे पहले तो चौंकीं, लेकिन फिर जवाब देने लगीं। हमारा चुंबन गहरा हो गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई।

मैंने उनका पल्लू खींच लिया। ब्लाउज खुला, उनकी मोटी चूचियां बाहर आ गईं। मैंने उन्हें दबाया, मुंह में लिया। ‘आह… राहुल… ये क्या कर रहे हो…’ वे सिसकी ले रही थीं, लेकिन हाथ मेरे बालों में फंसाए हुए। मैंने उनकी साड़ी उतार दी। पेटीकोट में उनकी गांड नंगी-नंगी। मैंने नीचे हाथ डाला, उनकी चूत पर। गीली थी। ‘सासु मां, आप भी तो चाहती हैं न?’ मैंने फुसफुसाया। वे सिर हिला रही थीं, ‘हां बेटा… लेकिन यहां? शादी में?’

‘कोई नहीं देखेगा।’ मैंने कहा और उन्हें किचन के टेबल पर झुका दिया। पेटीकोट ऊपर किया, उनकी गांड पर थप्पड़ मारा। सफेद गांड लाल हो गई। मैंने अपना पैंट खोला, मेरा लंड बाहर आ गया। कड़क, मोटा। मैंने उनकी चूत पर रगड़ा। ‘डालो बेटा… चोदो मुझे…’ वे बड़बड़ा रही थीं। मैंने एक झटके में लंड अंदर धकेल दिया। उनकी चूत टाइट थी, गर्म। ‘आह्ह्ह!’ वे चीखीं, लेकिन दबा ली। मैंने चोदना शुरू कर दिया। जोर-जोर से ठोक रहा था। उनकी गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी।

किचन में धप-धप की आवाज गूंज रही थी। बाहर शादी की धूम मची थी, संगीत बज रहा था, लेकिन यहां अंदर सासु मां की चुदाई हो रही थी। मैंने उनके बाल पकड़े, सिर पीछे खींचा। ‘कहो सासु मां, कैसा लग रहा है दामाद का लंड?’ ‘बहुत मोटा है बेटा… फाड़ रहा है मेरी चूत…’ वे सिसक रही थीं। मैंने स्पीड बढ़ाई। उनकी चूत से रस बह रहा था, मेरे लंड पर चिपचिपा। तभी दरवाजे पर खटखटाहट हुई। हम रुक गए। ‘कौन?’ कमला देवी ने आवाज दी। ‘मां, सब ठीक?’ नेहा की आवाज थी।

‘हां बेटी, बस सामान रख रही हूं।’ वे बोलीं, लेकिन मेरा लंड अभी भी अंदर था। नेहा चली गई। हम हंस पड़े। फिर चुदाई जारी। मैंने उन्हें उल्टा किया, टेबल पर लिटाया। चूचियां दबाईं, लंड फिर अंदर। अब मिशनरी पोजिशन। उनकी टांगें मेरी कमर पर लिपटीं। ‘चोदो जोर से… फाड़ दो…’ वे चीख रही थीं। मैं पेल रहा था। पसीना बह रहा था हम दोनों का। बाहर बारातियों की हंसी सुनाई दे रही थी, लेकिन हमारी दुनिया यहां थी।

अचानक, कमला देवी का शरीर कांपने लगा। ‘आ रही हूं बेटा… झड़ रही हूं…’ उनकी चूत सिकुड़ गई, रस छूटा। मैं भी नहीं रुक सका। ‘मैं भी… ले लो सासु मां…’ और मैंने अपना माल उनकी चूत में डाल दिया। गर्म वीर्य भर गया। हम सांसें फूल रही थीं। लंड निकाला, तो चूत से सफेद रस बह रहा था। वे उठीं, कपड़े ठीक किए। ‘बेटा, ये गलत था… लेकिन…’ ‘लेकिन मजा आया न?’ मैंने कहा। वे मुस्कुराईं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। शादी की रात और लंबी थी। रस्में खत्म हुईं, लेकिन मेहमान रुके हुए थे। रात के 11 बजे, घर शांत हो गया। नेहा सो रही थी, रिया अपनी ससुराल चली गई। मैं बाहर घूम रहा था, तभी कमला देवी फिर मिलीं। इस बार छत पर। ‘बेटा, नींद नहीं आ रही।’ वे बोलीं। चांदनी रात थी, हवा ठंडी। मैंने उन्हें गले लगा लिया। ‘तो फिर और मजा करते हैं।’ हम छत के कोने में चले गए, जहां कोई नहीं आता।

मैंने उनकी साड़ी फिर उतारी। इस बार नंगा करके। उनकी बॉडी चांदनी में चमक रही थी। चूचियां तन-तन। मैंने चूचियां चूसीं, निप्पल काटे। वे सिसकार रही थीं। फिर नीचे झुकीं, मेरा लंड मुंह में लिया। ‘सासु मां, आप तो एक्सपर्ट हो।’ मैं हंसा। वे चूस रही थीं, जीभ से लंड चाट रही। गले तक ले रही। मेरा लंड लार से भीगा। ‘अब चोदो मुझे डॉगी स्टाइल में।’ वे बोलीं। झुक गईं, गांड ऊपर की। मैंने पीछे से लंड डाला। चूत अभी भी गीली थी।

रात के सन्नाटे में चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं। ठप-ठप। उनकी गांड पर थप्पड़। ‘जोर से… मारो…’ वे कह रही थीं। मैंने बाल खींचे, कमर पकड़ी। लंड गहराई तक। उनकी चूत चरम पर। ‘फिर आ रही हूं…’ वे चीखीं। मैंने स्पीड बढ़ाई। इस बार गांड में डालने का मन हुआ। ‘सासु मां, गांड मारूं?’ ‘हां बेटा, फाड़ दो।’ मैंने लंड निकाला, चूत के रस से चिकना करके गांड में धकेला। टाइट थी, लेकिन अंदर चला गया। ‘आह्ह्ह! दर्द हो रहा है…’ लेकिन वे पीछे धकेल रही थीं।

मैंने गांड मारी। जोर-जोर से। उनकी चीखें दबी हुईं। ‘कमाल है सासु मां, कितनी टाइट है।’ ‘तेरा ही कमाल है बेटा।’ हम हंस रहे थे। फिर मैंने चूत में वापस डाला। अब अल्टरनेट। चूत-गांड। वे पागल हो रही थीं। आखिरकार, मैंने चूत में ही झड़ दिया। गर्म माल भर दिया। हम लेट गए, नंगे। तारे देख रहे थे। ‘बेटा, ये शादी की सबसे अच्छी रात थी।’ वे बोलीं।

सुबह हुई। शादी का अगला दिन। विदाई हो चुकी थी। परिवार इकट्ठा था। नेहा ने पूछा, ‘कल रात कहां थे तुम?’ ‘बस, घूम रहा था।’ मैं मुस्कुराया। कमला देवी पास से गुजरीं, उनकी आंखों में चमक। कोई नहीं जानता था हमारा राज। लेकिन मुझे पता था, ये आखिरी नहीं होगा। सासु मां की चुदाई अब नियमित हो जाएगी। शादी ने नया रिश्ता जोड़ा था – चुदाई का।

लेकिन कहानी और लंबी है। कुछ दिनों बाद, जब नेहा मायके आई, तो कमला देवी और मैं अकेले थे। घर में कोई नहीं। सुबह से शाम तक चुदाई। किचन में, बेडरूम में, बाथरूम में। उनकी चूत हमेशा गीली। ‘बेटा, तूने मुझे जवान कर दिया।’ वे कहतीं। मैं उनका हर होल भरता। मुंह, चूत, गांड। कभी वे ऊपर आतीं, सवार हो जातीं। चूचियां हिलातीं। कभी मैं नीचे, वे चूसतीं। वीर्य निगलतीं।

एक दिन, नेहा ने शक किया। ‘मां, तुम्हारी चाल बदल गई है।’ कमला देवी हंसी, ‘उम्र का असर।’ लेकिन रात को, जब नेहा सोई, हम फिर मिले। इस बार रिस्की। नेहा के बगल में। लेकिन वो अलग बात। सासु मां की चुदाई का सिलसिला जारी था। शादी की वो रात शुरुआत थी, अंत नहीं।

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