Pita ke jane ke bad beta maa ko behla phuslakar choda

पिता की मृत्यु के बाद घर में एक गहरा सन्नाटा छा गया था। रमेश, जो अब 22 साल का जवान हो चुका था, अपनी मां सरिता के दुख को देखकर व्याकुल हो उठता। सरिता, 42 वर्ष की एक सुंदर और आकर्षक महिला थीं, जिनकी आंखें हमेशा नम रहतीं। पिता की अचानक बीमारी से मौत ने उन्हें तोड़ दिया था। रमेश नौकरी करता था और घर का सारा खर्च उठाता, लेकिन मां का दर्द कम करने के लिए वह हमेशा उनके पास रहता।

पहले कुछ दिन तो सब सामान्य था। रमेश मां को चाय बनाकर देता, उनके कंधे पर हाथ रखकर सांत्वना देता। लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में एक गलत विचार आने लगा। सरिता की उदासी उसे कमजोर बनाती, और रमेश उसका फायदा उठाने की सोचने लगा। एक शाम, जब सरिता सोफे पर बैठी रो रही थीं, रमेश उनके पास गया। ‘मां, रो मत। मैं हूं ना तुम्हारे साथ। पापा चले गए, लेकिन मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोडूंगा।’ उसने सरिता को गले लगा लिया। सरिता ने भी उसके सीने पर सिर टिका दिया। रमेश का हाथ धीरे से उनकी पीठ पर फेरने लगा, जो सामान्य लग रहा था, लेकिन उसके अंदर की आग सुलग रही थी।

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अगले दिन सुबह, रसोई में सरिता चाय बना रही थीं। रमेश पीछे से आया और उनकी कमर पर हाथ रख दिया। ‘मां, तुम्हें आराम करना चाहिए। मैं बना लूंगा।’ सरिता मुड़ीं, लेकिन रमेश ने उन्हें छोड़ा नहीं। उसका हाथ थोड़ा ऊपर सरक गया, उनकी छाती को छूते हुए। सरिता चौंकीं, ‘बेटा, क्या कर रहे हो?’ लेकिन उनकी आवाज में गुस्सा कम था। रमेश ने कहा, ‘मां, तुम्हें खुश देखना चाहता हूं। पापा नहीं हैं, लेकिन मैं तुम्हारा हर दुख दूर कर सकता हूं।’ सरिता ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चाय पीने चली गईं।

शाम को, जब दोनों डिनर कर रहे थे, रमेश ने सरिता का हाथ पकड़ा। ‘मां, तुम्हारी आंखें सूजी हुई हैं। आओ, मैं तुम्हें मालिश कर दूं।’ सरिता हिचकिचाईं, लेकिन सहमत हो गईं। बेडरूम में, सरिता लेट गईं। रमेश ने उनके कंधों पर हाथ फेरना शुरू किया। धीरे-धीरे उसके हाथ नीचे सरक गए, उनकी पीठ पर, फिर कमर पर। सरिता की सांसें तेज हो गईं। ‘बेटा, बस करो।’ लेकिन रमेश ने सुना नहीं। उसने सरिता को पलटा और उनके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। सरिता ने धक्का दिया, लेकिन कमजोर थे। रमेश ने कहा, ‘मां, मुझे तुम्हारी जरूरत है। तुम्हें भी मेरी। हम अकेले हैं, क्यों ना एक-दूसरे का सहारा बनें?’ सरिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन उन्होंने विरोध नहीं किया। रमेश ने उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए। सरिता का शरीर अभी भी आकर्षक था – भरी हुई छाती, पतली कमर, गोल कूल्हे। रमेश का लंड कड़ा हो गया।

पहली बार का वह पल बेडरूम में ही था। रमेश ने सरिता को बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया। ‘मां, मैं तुम्हें प्यार करता हूं।’ उसने कहा और उनके स्तनों को चूसने लगा। सरिता सिसकारी भरने लगीं। रमेश ने अपनी पैंट उतारी और अपना मोटा लंड बाहर निकाला। सरिता ने देखा तो डर गईं, ‘नहीं बेटा, ये गलत है।’ लेकिन रमेश ने उनकी टांगें फैलाईं और लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। सरिता गीली हो चुकी थीं। रमेश ने एक झटके में अंदर डाल दिया। ‘आह!’ सरिता चीखीं। रमेश ने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया, लेकिन जल्दी ही रफ बन गया। वह सरिता के बालों को खींचते हुए तेजी से चोदने लगा। ‘मां, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है!’ सरिता दर्द और सुख में तड़प रही थीं। रमेश ने उन्हें डॉगी स्टाइल में घुमाया। सरिता घुटनों पर आ गईं, रमेश ने पीछे से पकड़ लिया। उसके हाथ सरिता के बालों में फंस गए, खींचते हुए लंड को गहराई तक ठोकने लगा। ‘हां मां, ऐसे ही झेलो!’ हर धक्के के साथ सरिता की चीखें गूंज रही थीं। आखिरकार, रमेश ने जोर से धक्का मारा और कमरे में झड़ गया, गर्म वीर्य सरिता की चूत में भर दिया। दोनों पसीने से तरबतर लेट गए। सरिता रो रही थीं, लेकिन रमेश ने उन्हें चुप करा लिया। ‘ये हमारा राज रहेगा, मां।’

अगले कुछ दिन बीते, लेकिन रमेश की भूख बढ़ती गई। सरिता अब विरोध कम करतीं, शायद उदासी में सहारा ढूंढ रही थीं। एक दोपहर, रसोई में सरिता सब्जी काट रही थीं। रमेश आया और पीछे से चिपट गया। उसका लंड पहले से ही कड़ा था। ‘मां, मुझे भूख लगी है।’ सरिता मुड़ीं, लेकिन रमेश ने उन्हें काउंटर पर झुकाया। ‘बेटा, यहां नहीं। कोई देख लेगा।’ लेकिन घर में कोई नहीं था। रमेश ने उनकी साड़ी ऊपर की और पेटीकोट हटा दिया। सरिता की गांड नंगी हो गई। रमेश ने थप्पड़ मारा, ‘झुक जाओ मां!’ सरिता झुक गईं। रमेश ने लंड निकाला और सीधे उनकी चूत में घुसेड़ दिया। रफ तरीके से चोदने लगा, बाल खींचते हुए। ‘आह बेटा, दर्द हो रहा है!’ सरिता चिल्लाईं, लेकिन रमेश रुका नहीं। डॉगी स्टाइल में ही, काउंटर पकड़कर तेज धक्के मारने लगा। सब्जी कटोरे गिर गए, लेकिन फर्क न पड़ा। रमेश ने सरिता की गांड पर थप्पड़ मारे, लंड को और गहरा दबाया। ‘तुम्हारी चूत मेरी है अब!’ कमरे में गूंजती चीखों के बीच, रमेश ने फिर झड़ दिया। सरिता कांप रही थीं, लेकिन मुस्कुराईं भी।

शाम को, जब दोनों लिविंग रूम में टीवी देख रहे थे, रमेश ने सरिता को अपनी गोद में खींच लिया। ‘मां, आज बाहर चलें?’ सरिता सहमत हो गईं। वे पार्क चले गए, जहां रात हो चुकी थी। पार्क सुनसान था। बेंच पर बैठे, रमेश ने सरिता को किस करना शुरू किया। उसके हाथ उनकी ब्लाउज में घुस गए, स्तनों को मसलने लगा। सरिता सांसें ले रही थीं। ‘बेटा, यहां खतरा है।’ लेकिन रमेश ने उन्हें झाड़ियों की ओर ले जाया। वहां, घास पर सरिता को डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। बाल खींचकर लंड अंदर डाला। ‘चुप रहो मां, मजा लो।’ रफ सेक्स शुरू हो गया। रमेश के धक्के इतने जोरदार थे कि सरिता की चीखें दबाने पड़ीं। हवा में ठंडक थी, लेकिन उनके शरीर गर्म। रमेश ने गांड पर थप्पड़ मारे, लंड को चूत से निकालकर गांड में डालने की कोशिश की। सरिता चीखीं, ‘नहीं, दर्द!’ लेकिन रमेश ने थोड़ा सा घुसाया और फिर चूत में वापस। आखिर में, दोनों थककर लेट गए। पार्क से लौटते हुए, सरिता ने रमेश का हाथ पकड़ा।

कुछ दिनों बाद, रमेश ने सरिता को कार में घुमाने ले जाने का प्लान बनाया। रात का समय था, वे हाईवे पर थे। रमेश ने कार साइड में रोकी। ‘मां, थोड़ा आराम करें।’ सरिता सीट पर लेटीं, लेकिन रमेश ने उन्हें बैकसीट पर खींच लिया। वहां, सीमित जगह में, सरिता को डॉगी स्टाइल में घुमाया। बाल खींचते हुए लंड चूत में ठोका। कार हिल रही थी। ‘बेटा, कोई आ जाएगा!’ सरिता डर रही थीं, लेकिन सुख में डूबीं। रमेश ने रफ तरीके से पेला, स्तनों को पीछे से पकड़कर मसला। धक्के तेज, बालों की चाबुक की तरह खिंचाव। कमरे की तरह यहां भी चीखें गूंजीं, लेकिन कार के शीशे बंद थे। रमेश ने सरिता की चूत में गहराई तक झड़ दिया। दोनों पसीने से भीगे, कार में लौटे।

घर लौटकर, बाथरूम में नहाते समय रमेश सरिता के साथ घुस गया। ‘मां, मैं तुम्हें नहला दूं।’ सरिता सहमत। लेकिन जल्दी ही रमेश ने उन्हें दीवार से सटाकर डॉगी स्टाइल किया। बाल गीले, खींचते हुए लंड अंदर। पानी बह रहा था, लेकिन सेक्स रफ। थप्पड़, धक्के, चीखें। ‘मां, तुम्हारी बॉडी कमाल की है!’ रमेश ने कहा। सरिता अब पूरी तरह समर्पित हो चुकी थीं। बाथरूम से निकलकर, वे बेडरूम में गए, जहां फिर से एक राउंड चला।

समय बीतता गया, और उनका रिश्ता गहरा होता गया। रमेश हर लोकेशन पर सरिता को चोदता – किचन, लिविंग रूम, पार्क, कार, बाथरूम, यहां तक कि एक बार छत पर भी। हर बार हार्डकोर, रफ, बाल खींचना, डॉगी स्टाइल। सरिता की उदासी कम हो गई, अब वह रमेश के स्पर्श में खुशियां ढूंढतीं। ‘बेटा, तुमने मुझे नया जीवन दिया।’ एक रात बेडरूम में लेटे हुए सरिता ने कहा। रमेश मुस्कुराया, ‘मां, ये तो शुरुआत है।’ और फिर से, बाल खींचते हुए, डॉगी में चोदना शुरू कर दिया। उनका राज सुरक्षित था, और सुख अनंत।

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