Maa ko Mere bachpan ke dost ne choda
मैंरा नाम राज । मेरी उम्र 22 साल है और मैं अपने बचपन के दोस्त अजय के साथ बड़ा हुआ हूँ। हम दोनों पड़ोस में रहते थे और स्कूल के दिनों से ही घनिष्ठ मित्र थे। लेकिन जो कुछ भी हुआ, वो मेरी कल्पना से परे था। मेरी माँ का नाम सीमा है, उम्र 42 साल, लेकिन वो अभी भी बेहद आकर्षक लगती हैं। उनका फिगर 36-28-38 का है, गोरी चिट्टी त्वचा, लंबे काले बाल और हमेशा साड़ी में जो उन्हें और भी सेक्सी बना देती है। अजय हमेशा से ही मेरी माँ पर नजर रखता था, लेकिन मुझे कभी शक नहीं हुआ।
एक दिन, मैं कॉलेज गया हुआ था। अजय मेरे घर आया और माँ से बात करने लगा। वो बहाने से आया था, लेकिन उसका इरादा कुछ और था। माँ चाय बना रही थीं किचन में। अजय पीछे से आया और माँ के कंधे पर हाथ रख दिया। ‘आंटी, आप कितनी सुंदर हैं,’ उसने धीरे से कहा। माँ चौंकीं, लेकिन मुस्कुराईं। ‘अरे अजय, तू तो बड़ा शरारती हो गया है।’ अजय ने हिम्मत जुटाई और माँ को अपनी ओर खींच लिया। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया, और उसके बड़े-बड़े स्तन आधे नंगे हो गए। अजय ने तुरंत माँ के होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए। माँ ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन अजय की मजबूत बाहों में फंसकर वो नरम पड़ गईं।
अजय ने माँ को किचन के काउंटर पर झुका दिया और उनकी साड़ी ऊपर सरका दी। माँ की पैंटी नम हो चुकी थी। अजय ने अपनी पैंट खोली और अपना मोटा लंड बाहर निकाला – कम से कम 8 इंच लंबा और मोटा। ‘आंटी, मैं आपकी चूत को चोदना चाहता हूँ,’ उसने फुसफुसाया। माँ की सांसें तेज हो गईं। अजय ने माँ की पैंटी एक तरफ सरकाई और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। माँ की चूत गीली थी, और लंड आसानी से सरक गया। वो धीरे-धीरे अंदर-पहर धकेलने लगा। माँ ने कराहना शुरू कर दिया, ‘आह… अजय… ये गलत है… लेकिन… आह्ह्ह!’ अजय ने पूरी ताकत से धक्का मारा और अपना लंड माँ की चूत के अंदर पूरी तरह घुसेड़ दिया। चूत की दीवारें उसके लंड को कसकर जकड़ रही थीं।
अजय ने माँ को जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ माँ के स्तन उछल रहे थे। वो माँ के ब्लाउज को खोल दिया और उनके निप्पलों को चूसने लगा। माँ की चूत से चुदाई की आवाजें आ रही थीं – चपचप, चपचप। अजय ने माँ के बाल पकड़े और उन्हें पीछे खींचा, ताकि वो और गहराई से चोद सके। ‘आंटी, आपकी चूत कितनी टाइट है! राज के पापा के बाद शायद पहली बार कोई और लंड ले रही हो,’ अजय ने हँसते हुए कहा। माँ शर्म से लाल हो गईं, लेकिन उनकी चूत और गीली हो गई। आखिरकार, अजय ने तेज धक्के दिए और अपना गर्म वीर्य माँ की चूत में उंडेल दिया। माँ भी झड़ गईं, उनकी चूत सिसकियां भर रही थी।
इसके बाद, अजय और माँ का रिश्ता गुप्त हो गया। वो चुपके-चुपके मिलते। लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब अजय के घर पर एक फैमिली फंक्शन था। अजय के पिता का बर्थडे था, और उन्होंने हमें इनवाइट किया। मैं, माँ और पापा सब गए। घर में ढेर सारे रिश्तेदार थे, संगीत चल रहा था, खाना परोसा जा रहा था। माँ ने लाल साड़ी पहनी थी, जो उनके कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी। अजय की नजरें माँ पर टिकी हुई थीं।
फंक्शन के बीच में, अजय ने माँ को बहाने से ऊपर अपने रूम में बुला लिया। ‘आंटी, एक मिनट के लिए आ जाओ, कुछ दिखाना है,’ उसने कहा। माँ जानती थीं कि क्या होने वाला है, लेकिन वो चली गईं। मैं नीचे लोगों से बात कर रहा था। अजय ने दरवाजा बंद किया और माँ को बेड पर धकेल दिया। ‘अजय, यहाँ? सब लोग नीचे हैं!’ माँ ने फुसफुसाया। लेकिन अजय ने उनकी साड़ी खींच ली। माँ के पैर फैल गए, और उनकी चूत फिर से नंगी हो गई। अजय ने अपना लंड बाहर निकाला, जो पहले से ही खड़ा था।
वो माँ के ऊपर चढ़ गया और बिना देर किए अपना लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया। माँ ने अपना मुंह दबा लिया ताकि कराह न निकले, लेकिन अजय के धक्कों से बेड हिल रहा था। ‘शशश… धीरे,’ माँ बोलीं। लेकिन अजय ने और जोर से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड माँ की चूत को चीर रहा था, गहराई तक जा रहा था। नीचे से संगीत की आवाज आ रही थी, जो उनकी चुदाई की आवाजें दबा रही थीं। अजय ने माँ के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया, उनके निप्पलों को काटा। माँ की चूत रस टपक रही थी, लंड अंदर-बाहर सरकते हुए चिकना हो गया।
अचानक, दरवाजे पर खटखटाहट हुई। मैं था! ‘अजय भाई, कहाँ हो? माँ को ढूंढ रहा हूँ।’ अजय रुक गया, लेकिन उसका लंड अभी भी माँ की चूत में था। माँ घबरा गईं। अजय ने धीरे से कहा, ‘एक मिनट, राज! आंटी यहाँ हैं, कुछ बात कर रहे हैं।’ मैं चला गया। अजय ने फिर से चुदाई तेज कर दी। ‘उफ्फ… कितना रिस्की है ये,’ माँ बोलीं, लेकिन उनकी चूत कसकर लंड को जकड़ रही थी। अजय ने माँ को डॉगी स्टाइल में कर दिया। उनके बड़े गांड को थपथपाते हुए पीछे से लंड ठोकने लगा। हर धक्के से माँ की गांड लहरा रही थी। आखिरकार, अजय ने अपना माल माँ की चूत में ही छोड़ दिया। माँ भी ऑर्गेज्म पर पहुँच गईं, उनका शरीर कांप रहा था।
माँ ने जल्दी से साड़ी संभाली और नीचे आ गईं। उनका चेहरा लाल था, आँखें चमक रही थीं। मैंने कुछ पूछा तो बोलीं, ‘बस, थक गई हूँ।’ अजय मुस्कुरा रहा था। उसके बाद, वो रातें हमारी फैमिली के लिए बदल गईं। अजय अब खुलकर माँ को चोदता, कभी घर पर, कभी बाहर। लेकिन वो फंक्शन वाली रात हमेशा याद रहेगी – जब मेरी माँ मेरे दोस्त की चूत की भूखी हो गई।
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