Maa Ki Train Me Chudai 2

कुछ महीनों बाद, रीता की ज़िंदगी में एक नई रौनक आ गई थी। राजेश से मिलना-जुलना अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। बेटा स्कूल-कॉलेज में व्यस्त रहता, और रीता को फुर्सत मिल जाती। लेकिन जोखिम का रोमांच उन्हें अलग नहीं होने देता। ट्रेन की वो पहली मुलाकात अब उनकी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट बन चुकी थी। रीता घर पर अकेली रहते हुए राजेश के मैसेज़ पढ़ती, और उसका बदन गर्म हो जाता। ‘भाभी, आज शाम को पार्क में मिलते हैं?’ राजेश का मैसेज आया। रीता ने मुस्कुराते हुए रिप्लाई किया, ‘हाँ अंकल, लेकिन जल्दी आना।’

शाम ढलते ही रीता साड़ी पहनकर निकल पड़ी। हल्की गुलाबी साड़ी, जो उसके गोरे बदन पर लहरा रही थी। पार्क के एक सुनसान कोने में राजेश इंतज़ार कर रहा था। बेंच पर बैठे-बैठे उसने रीता का हाथ पकड़ा। ‘भाभी, तुम्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।’ रीता ने शरमाते हुए देखा, लेकिन उसकी आँखों में वही आग थी। पार्क में लोग टहल रहे थे, लेकिन वो कोना घने पेड़ों से ढका था। राजेश ने रीता को अपनी गोद में खींच लिया। साड़ी का पल्लू सरका दिया, और ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। रीता के भारी स्तन बाहर आ गए, निप्पल्स पहले से ही सख्त। राजेश ने एक को मुँह में भर लिया, जोर से चूसा। रीता ने कराह ली, ‘आह… अंकल… कोई देख लेगा।’

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‘देखने दो, भाभी। जोखिम ही तो हमारा मज़ा है,’ राजेश ने कहा और दूसरे स्तन को दाँतों से काटा। रीता का बदन सिहर उठा। उसने राजेश की शर्ट के बटन खोले, छाती पर किस्से किए। नीचे हाथ डाला, पैंट के ऊपर से लंड को दबाया। वो पहले से ही कड़ा था, फड़फड़ा रहा था। रीता ने ज़िप खोली, लंड बाहर निकाला। मोटा तना, सिरा चमकदार। उसने मुट्ठी में पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगी। राजेश की साँसें तेज़ हो गईं। ‘भाभी, चूस लो इसे।’ रीता ने चारों तरफ देखा, कोई नहीं था। वह झुकी, लंड मुँह में ले लिया। जीभ से सिरा चाटा, फिर पूरा गले तक दबाया। राजेश ने उसके सिर को दबाया, धक्के देने लगा। लार टपक रही थी, चूसने की आवाज़ हल्की आ रही थी।

अचानक दूर से किसी की कदमों की आहट सुनाई दी। वे रुक गए। रीता ने लंड मुँह से निकाला, लेकिन राजेश ने उसे नहीं छोड़ा। ‘चलो, और अंदर चलते हैं,’ उसने कहा। पार्क के पीछे एक पुराना शेड था, जहाँ रखरखाव का सामान रखा रहता। वे वहाँ पहुँचे। दरवाज़ा बंद किया। अंदर अंधेरा था, लेकिन रोमांच दोगुना। राजेश ने रीता की साड़ी ऊपर चढ़ाई, पेटीकोट में हाथ डाला। चूत पहले से गीली थी, उंगलियाँ सरक गईं। उसने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं, अंदर-बाहर करने लगा। रीता दीवार से सटी, कराह रही थी। ‘हाँ अंकल… और गहरा…’

राजेश ने घुटनों पर बैठकर रीता की चूत चाटनी शुरू की। जीभ क्लिट पर घुमाई, होंठों से चूसा। रीता के पैर काँपने लगे, रस बहने लगा। ‘आह… चाटो… न चोड़ो मुझे।’ राजेश उठा, लंड चूत पर रगड़ा। एक धक्के में पूरा अंदर। रीता चीखी, लेकिन मुँह दबा लिया। चोदना शुरू। धक्के तेज़, शेड हिल रहा था। राजेश ने उसके स्तनों को मसलते हुए कमर पकड़ी। ‘भाभी, तुम्हारी चूत कितनी गरम है। सालों बाद कोई मिला तो।’ रीता ने जवाब दिया, ‘चोदो अंकल… फाड़ दो इस चूत को।’ बाहर से हवा चल रही थी, लेकिन अंदर आग सुलग रही थी।

वे पोज़ीशन बदला। रीता दीवार के सहारे खड़ी, राजेश पीछे से। लंड चूत में घुसा, गांड पर थप्पड़ मारे। ‘मारो और ज़ोर से,’ रीता बोली। राजेश ने स्पीड बढ़ाई। फिर लंड निकाला, गांड पर थूक लगाया। धीरे से अंदर डाला। रीता दर्द से सिसकी, लेकिन सुख भी था। ‘आह… धीरे… हाँ, अब ठीक।’ गांड में धक्के, कसी हुई। राजेश का पसीना टपक रहा था। ‘भाभी, तुम्हारी गांड भी कमाल की।’ चोदते-चोदते वो वापस चूत में आ गया। आखिर में तेज़ धक्के, कम फूटा। गर्म वीर्य चूत भर गया। रीता भी झड़ गई, बदन ऐंठा। वे हाँफते हुए बैठ गए।

पार्क से लौटते हुए रीता सोच रही थी, ये रिश्ता कितना ख़तरनाक है। बेटे को शक हो गया तो? लेकिन यही ख़तरा उन्हें बाँधे रखता। अगले हफ्ते, राजेश ने एक नया प्लान बनाया। ‘भाभी, मेरे फार्महाउस पर चलो। वहाँ कोई नहीं पहुँचेगा।’ रीता मान गई। बेटे को दोस्त के यहाँ छोड़कर वो राजेश के साथ कार में बैठी। रास्ते में ही राजेश ने ड्राइविंग करते हुए रीता का हाथ अपनी जांघ पर रखा। ‘सहलाओ भाभी।’ रीता ने पैंट खोली, लंड पकड़ा। कार की स्पीड के साथ सहलाया। राजेश की आँखें सड़क पर, लेकिन मन रीता पर।

फार्महाउस पहुँचे। बड़ा सा घर, चारों तरफ खेत। अंदर पहुँचते ही राजेश ने रीता को बेड पर पटक दिया। साड़ी उतारी, नंगी कर दिया। रीता के बदन पर किस्से किए, हर इंच चाटा। स्तनों को चूसा, निप्पल्स काटे। रीता ने उसके लंड को पकड़ा, चूसा। गले तक लिया, अंडकोष सहलाए। राजेश कराहा, ‘हाँ भाभी… ऐसे ही।’ फिर रीता को लिटाया, टांगें फैलाईं। चूत चाटी लंबे समय तक। जीभ अंदर घुमाई, क्लिट चूसी। रीता चिल्लाई, रस छूटा।

राजेश ने लंड डाला। मिशनरी में चोदा। धक्के गहरे, बेड चरमरा रहा। ‘चोदो अंकल… और ज़ोर से।’ फिर डॉगी। पीछे से, गांड पकड़कर। थप्पड़ मारे, बाल खींचे। रीता का बदन लाल हो गया। ‘हाँ… मारो… चोदो।’ फिर काउगर्ल। रीता ऊपर बैठी, लंड पर उछली। स्तन उछल रहे थे, राजेश ने पकड़े। कम झड़ा, चूत में। रीता भी orgasam पर। लेकिन रुके नहीं। रात भर चुदाई चली। सुबह बगीचे में, घास पर। राजेश ने रीता को लिटाया, खुले आसमान के नीचे चोदा। पक्षियों की चहचहाहट में कराहें।

फार्महाउस से लौटकर रीता को एहसास हुआ, ये सिर्फ़ शारीरिक नहीं, भावनात्मक भी हो रहा है। राजेश से बातें, हँसी-मज़ाक। लेकिन जोखिम बरकरार। एक दिन बेटे ने पूछा, ‘माँ, तुम इतने खुश क्यों रहती हो?’ रीता मुस्कुराई, ‘बेटा, ज़िंदगी में नई शुरुआत।’ राजेश ने फिर ट्रेन का सफर प्लान किया। इस बार लंबी जर्नी। रीता बेटे को बहाना बनाकर चढ़ी। राजेश पहले से बोगी में। कोने में मिले।

ट्रेन चलते ही शुरूआत। साड़ी ऊपर, उंगलियाँ चूत में। रीता राजेश के लंड को सहला रही। फिर बाथरूम। तंग जगह, लेकिन उत्तेजना। राजेश ने रीता को दीवार से सटाया, लंड चूत में डाला। धक्के, ट्रेन की रफ्तार के साथ। ‘आह… अंकल… दरवाज़ा खुल जाएगा।’ ‘खुलने दो, चोदते रहूँगा।’ कम झड़ा, वीर्य टपका। बाहर निकले, चेहरे लाल। रास्ते भर ऐसे ही। रात को बर्थ पर, कंबल के नीचे। राजेश ने चुपके से चूत में उंगली डाली, रीता सहलाती रही।

ट्रेन के सफर ने उनके रिश्ते को और मज़बूत किया। लेकिन एक दिन मुसीबत आई। बेटे के दोस्त ने रीता को पार्क में देखा था। शक हुआ। रीता डर गई। राजेश से बोली, ‘अंकल, अब रुक जाएँ?’ राजेश ने कहा, ‘भाभी, जोखिम ही तो हमारा प्यार है। सावधान रहेंगे।’ वे मिलते रहे, लेकिन छुपकर। एक बार बेटे के स्कूल फंक्शन में राजेश आया। पीछे के कमरे में, जल्दी से चुदाई। रीता की चूत में लंड, धक्के तेज़। ‘फटाफट अंकल… कोई आएगा।’ कम झड़ा, बाहर आए।

समय बीता। रीता गर्भवती हो गई। राजेश का बच्चा। डर था, लेकिन खुशी भी। उन्होंने शादी का फैसला किया। बेटे को बताया। शुरू में गुस्सा, लेकिन मान गया। राजेश ने रीता को अपनाया। अब जोखिम खत्म, लेकिन सुख बरकरार। रातें चुदाई की, सुबहें प्यार की। प्यार की चिंगारी अब घर की आग बन गई। ट्रेन की यादें ताज़ा, लेकिन नई ज़िंदगी शुरू।

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