Beta, Maa ko blackmail karke chodta hai
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में राकेश और उसकी माँ सीमा का रिश्ता बाहर से तो बिल्कुल सामान्य लगता था। राकेश 22 साल का जवान लड़का था, जो कॉलेज में पढ़ाई करता था और घर पर माँ के साथ रहता था। उसके पिता शहर से बाहर नौकरी करते थे, इसलिए घर में माँ-बेटे का ही राज चलता था। सीमा 42 साल की हसीन औरत थी, लंबे काले बाल जो हमेशा घनी चोटी में बंधे रहते थे, गोरा रंग और आकर्षक फिगर जो किसी को भी ललचा दे। लेकिन राकेश को हाल ही में एक ऐसा राज पता चला था, जो उसकी जिंदगी बदलने वाला था।
एक शाम, जब सीमा नहाने गई थी, राकेश ने उसके फोन पर एक मैसेज देख लिया। मैसेज किसी पुराने प्रेमी का था, जिसमें सीमा को धमकी दी जा रही थी कि अगर पैसे न दिए तो उनके पुराने अफेयर की तस्वीरें सबके सामने आ जाएंगी। राकेश का दिमाग घूम गया। उसकी माँ, जो हमेशा इतनी सादी-सादी रहती थी, का ऐसा अतीत? वो तुरंत फोन छिपा लिया और इंतजार करने लगा।
रात को जब सीमा सोने गई, राकेश उसके कमरे में घुसा। ‘माँ, मुझे सब पता चल गया है।’ वो बोला, फोन दिखाते हुए। सीमा का चेहरा सफेद पड़ गया। ‘बेटा, ये क्या कह रहे हो? वो… वो पुरानी बात है।’ वो घबरा गई। राकेश मुस्कुराया, ‘पुरानी बात? अगर पापा को पता चला तो? या पड़ोसियों को? मैं सबको बता दूंगा, जब तक तुम मेरी एक शर्त न मानो।’ सीमा की आंखों में आंसू आ गए, ‘कौन सी शर्त?’ राकेश ने दरवाजा बंद किया और पास आ गया, ‘तुम्हें मुझे खुश करना होगा, जैसा कोई प्रेमी खुश करता है। आज से तुम मेरी हो।’
सीमा समझ गई, लेकिन चुप रही। राकेश ने उसे बेड पर धकेला और उसके ऊपर चढ़ गया। ‘माँ, तुम्हारी चोटी कितनी सेक्सी लगती है।’ उसने कहा और सीमा के लंबे बालों को खोल दिया। बाल घने काले लहरों की तरह बिखर गए। राकेश ने मुट्ठी भर बाल पकड़े और सीमा का सिर पीछे खींचा। सीमा दर्द से चीखी, लेकिन राकेश ने उसके होंठ चूस लिए। वो जोर-जोर से चूम रहा था, दांतों से काटते हुए। सीमा विरोध करने की कोशिश की, लेकिन राकेश की पकड़ मजबूत थी।
उसने सीमा की साड़ी खींच ली और ब्लाउज फाड़ दिया। सीमा के बड़े स्तन बाहर आ गए, गुलाबी निप्पल्स तन चुके थे। राकेश ने एक निप्पल मुंह में लिया और जोर से चूसा, दांतों से काटा। सीमा कराह उठी, ‘बेटा, मत करो… ये गलत है।’ लेकिन राकेश ने बाल फिर खींचे, ‘चुप रहो माँ, वरना सबको बता दूंगा।’ वो नीचे उतरा और सीमा की पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया। उसकी चूत पर हाथ फेरा, जो पहले से गीली हो चुकी थी। ‘देखो माँ, तुम्हें भी मजा आ रहा है।’ राकेश ने अपनी पैंट उतारी और कठोर लंड बाहर निकाला। वो सीमा की चूत पर रगड़ने लगा।
सीमा ने आंखें बंद कर लीं, लेकिन राकेश ने बाल खींचकर सिर ऊपर किया, ‘देखो माँ, कैसे चोदूंगा तुम्हें।’ फिर एक झटके में लंड अंदर डाल दिया। सीमा चीख पड़ी, दर्द से। राकेश ने जोरदार धक्के मारने शुरू किए, हर धक्के के साथ बाल खींचते हुए। बेड हिल रहा था, सीमा की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। ‘आह… बेटा… धीरे…’ लेकिन राकेश और तेज हो गया। वो सीमा को डॉगी स्टाइल में घुमाया, चोटी फिर बना दी और उसे पकड़कर पीछे से चोदने लगा। बालों को रस्सी की तरह खींचते हुए, लंड गहराई तक ठोक रहा था। सीमा की चूत से रस टपक रहा था। आखिरकार राकेश ने गरम वीर्य सीमा की चूत में उंडेल दिया। दोनों पसीने से तर थे। ‘ये तो शुरुआत है माँ। कल फिर मिलेंगे।’ राकेश बोला और चला गया।
अगले दिन सुबह, राकेश घर पर अकेला था। पिता तो वैसे भी बाहर थे। सीमा किचन में काम कर रही थी। राकेश पीछे से आया और कमर पकड़ ली। ‘माँ, कल रात मजा आया न?’ सीमा सिहर गई, ‘बेटा, कृपया… यहां नहीं।’ लेकिन राकेश ने साड़ी ऊपर चढ़ा दी और चूत में उंगली डाल दी। सीमा सहम गई। राकेश ने उसे काउंटर पर झुकाया और डॉगी स्टाइल में लंड अंदर कर दिया। बालों की चोटी पकड़ी और जोर-जोर से पेलने लगा। किचन में चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं – प्लाप प्लाप। सीमा दबे दबे कराह रही थी, डर से कि कोई सुन न ले। राकेश ने बाल खींचे, ‘कराओ माँ, जोर से।’ वो तेजी से धक्के मारता रहा, सीमा की गांड पर थप्पड़ मारते हुए। आखिर में फिर चूत में झड़ गया। ‘शाम को बाहर चलेंगे माँ।’ राकेश ने कहा।
शाम को राकेश ने सीमा को पार्क ले गया। वो एक सुनसान पार्क था, जहां रात के समय लोग कम आते थे। लेकिन राकेश का इरादा खुला सेक्स करने का था। पार्क में घुसते ही राकेश ने सीमा को पेड़ के पास ले जाकर दीवार से सटा दिया। ‘यहां चोदूंगा माँ, जहां कोई भी देख सकता है।’ सीमा घबरा गई, ‘नहीं बेटा, कोई देख लेगा।’ लेकिन राकेश ने चोटी पकड़ी और साड़ी खींच ली। हवा में सीमा का नंगा शरीर चमक रहा था। राकेश ने लंड बाहर निकाला और सीमा को डॉगी स्टाइल में झुकाया। बाल खींचते हुए पीछे से घुस गया। पार्क की ठंडी हवा में चुदाई हो रही थी, सीमा की चीखें दबाने की कोशिश कर रही थी। राकेश ने गांड पर थप्पड़ मारे, ‘चिल्लाओ माँ, मजा लो।’ धक्के तेज हो गए, लंड चूत को चीर रहा था। दूर से कोई आवाज आई, लेकिन राकेश रुका नहीं। आखिरकार वो झड़ गया, वीर्य बाहर टपकने लगा। सीमा कांप रही थी, लेकिन राकेश ने कहा, ‘अभी तो और जगहें बाकी हैं।’
अगले हफ्ते, राकेश ने सीमा को कार में ले जाया। वो हाईवे पर ड्राइव कर रहे थे, रात का समय था। राकेश ने कार साइड में रोकी और सीमा को बैक सीट पर धकेला। ‘यहां चोदूंगा माँ, सड़क किनारे।’ सीमा ने विरोध किया, लेकिन राकेश ने बालों को मुट्ठी में लपेटा और चूत में लंड ठोंक दिया। डॉगी स्टाइल में कार हिल रही थी, बाहर से ट्रक गुजर रहे थे। राकेश बाल खींचकर सिर पीछे खींचे, सीमा की गर्दन पर किस करता हुआ। धक्के इतने जोरदार कि सीमा की चीखें कार में गूंजीं। ‘आह… बेटा… मार डालोगे।’ लेकिन राकेश ने गांड पेलना शुरू कर दिया, लंड गहराई तक। आखिर में चूत में ही झाड़ दिया। कार के शीशे भाप से ढक गए थे।
फिर एक दिन, राकेश ने सीमा को जंगल ले गया। वो एक पास का फॉरेस्ट एरिया था, जहां पिकनिक स्पॉट था लेकिन रात को खाली। राकेश ने टेंट लगाया और अंदर ले गया। लेकिन बाहर ही चोदना चाहता था। ‘खुली हवा में माँ, तुम्हारी चोटी खोलकर।’ सीमा नंगी हो गई, लंबे बाल बिखरे। राकेश ने उसे घास पर डॉगी स्टाइल में लिटाया और बाल पकड़कर चोदना शुरू किया। जंगल की आवाजें – पत्तियों की सरसराहट, जानवरों की – के बीच चुदाई हो रही थी। राकेश ने जोर से धक्के मारे, बाल खींचे, सीमा की पीठ पर नाखून चलाए। सीमा कराह रही थी, ‘बेटा… और जोर से…’ अब वो भी मजा लेने लगी थी। राकेश ने पोजीशन बदली, सीमा को उल्टा करके गांड ऊपर की और पीछे से पेला। लंड चूत और गांड दोनों में घुसाया। आखिर में वीर्य बाहर छिड़क दिया, सीमा के बालों पर।
समय बीतता गया, राकेश का ब्लैकमेल जारी रहा। घर में, किचन में, बाथरूम में – हर जगह चुदाई। एक बार बाथरूम में, सीमा नहा रही थी। राकेश घुसा और बाल गीले करके चोटी बनाई। फिर दीवार से सटाकर डॉगी में चोदा। पानी की धार के नीचे धक्के मारते हुए, बाल खींचे। सीमा की चीखें पानी की आवाज में दब गईं।
एक और बार, छत पर रात को। पड़ोसियों के घर की लाइट्स जली हुईं, लेकिन राकेश ने सीमा को नंगा करके डॉगी में लिया। बाल हवा में लहरा रहे थे, वो उन्हें पकड़कर खींचा। चुदाई की आवाजें हवा में उड़ रही थीं। सीमा अब विरोध कम करती, शायद आदत पड़ गई थी। राकेश ने कहा, ‘माँ, तुम मेरी रंडी हो अब।’ और जोर से झाड़ा।
इस तरह महीनों बीत गए। राकेश का राज बरकरार रहा, और सीमा उसके वशीभूत। हर बार नई जगह, नया तरीका – बाल खींचना, डॉगी स्टाइल, रफ चुदाई। उनकी जिंदगी अब इस गुप्त रिश्ते की थी। कभी-कभी सीमा खुद राकेश को बुलाती, चोटी बनाकर। ब्लैकमेल से शुरू हुआ ये रिश्ता अब जुनून बन गया था।
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