Padosi ke hote hue bhi, maa-bete ka chori-chori sex

शालिनी और रोहन की जिंदगी में एक अनकहा राज था, जो उनके रिश्ते को एक खतरनाक उत्तेजना से भर देता था। शालिनी, 42 साल की एक आकर्षक औरत, जिसकी गोरी त्वचा और भरे हुए स्तन किसी को भी मदहोश कर देते थे। उसके लंबे काले बाल और कूल्हों की चाल हमेशा पड़ोसियों की नजरों में रहती। रोहन, उसका 20 साल का बेटा, जवान और ताकतवर, जिसका मजबूत शरीर और लंबा लंड मां के लिए एक लत बन चुका था। वे दोनों चोरी-छिपे सेक्स करते थे, लेकिन पड़ोसी अंकल की मौजूदगी में यह खेल और भी जोखिम भरा हो जाता था। खतरा ही उनकी उत्तेजना को दोगुना कर देता था।

एक शाम, घर में सब शांत था। शालिनी रसोई में खाना बना रही थी, जब दरवाजे की घंटी बजी। यह पड़ोसी अंकल, मिस्टर वर्मा थे, जो अक्सर आकर गपशप करने आ जाते। रोहन ऊपर के कमरे में था, लेकिन जैसे ही उसने मां की आवाज सुनी, उसका लंड सख्त होने लगा। शालिनी ने दरवाजा खोला और वर्मा अंकल को अंदर आने को कहा। वे लिविंग रूम में बैठ गए, चाय पीने लगे। शालिनी ने रोहन को ऊपर से इशारा किया कि नीचे न आए। लेकिन रोहन की आंखों में शरारत थी।

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वर्मा अंकल चाय पीते हुए बातें कर रहे थे, ‘शालिनी जी, रोहन कहां है? आजकल तो वो कम ही दिखता है।’ शालिनी मुस्कुराई, ‘ऊपर पढ़ाई कर रहा है।’ लेकिन अंदर ही अंदर उसकी चूत गीली हो रही थी। रोहन चुपके से सीढ़ियों से उतरा और रसोई में घुस गया। शालिनी वहां चाय का कप रख रही थी। रोहन ने पीछे से उसके कूल्हों को दबाया। शालिनी चौंकी, लेकिन वर्मा अंकल की आवाज सुनकर सिहर गई। खतरे की वजह से उसकी सांसें तेज हो गईं।

रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, ‘मां, मुझे तुम्हारी चूत चाहिए।’ शालिनी ने मना किया, लेकिन रोहन ने उसके साड़ी के आंचल को खींच लिया। वह काउंटर के पीछे खड़ी हो गई, रोहन ने जल्दी से अपनी पैंट नीचे की और अपना सख्त लंड बाहर निकाला। शालिनी ने झुककर काउंटर पर हाथ टिकाया। रोहन ने उसके पेटीकोट ऊपर चढ़ाया और चूत में उंगली डाल दी। शालिनी कांप गई, ‘बेटा, अंकल सुन लेंगे।’ लेकिन रोहन ने हंसते हुए कहा, ‘यही तो मजा है।’

वह डॉगिस्टाइल में खड़ी शालिनी के पीछे लग गया। बालों को मुट्ठी में पकड़कर खींचा और लंड को चूत पर रगड़ा। शालिनी की चूत रस से भीगी हुई थी। एक झटके में रोहन ने पूरा लंड अंदर धकेल दिया। शालिनी का मुंह दबाने के लिए हाथ रखना पड़ा, क्योंकि वर्मा अंकल की हंसी लिविंग रूम से आ रही थी। रोहन ने जोर-जोर से ठुकाई शुरू कर दी, हर धक्के में बाल खींचते हुए। ‘आह… बेटा… धीरे…’ शालिनी फुसफुसाई, लेकिन उत्तेजना इतनी थी कि वह खुद पीछे धकेल रही थी। रोहन ने रफ तरीके से कमर पकड़ी और तेजी से पेला। चूत की चपचाप की आवाज रसोई में गूंज रही थी, लेकिन शोर मर्दम से ढक गया। आखिरकार, रोहन ने गरम वीर्य चूत में उंडेल दिया। शालिनी कांपते हुए सीधी हुई, कप लेने लगी। खतरे ने उनकी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा दिया था।

वर्मा अंकल चाय पीकर चले गए। रात को, जब घर शांत हो गया, रोहन ने मां को बुलाया। लेकिन अगला मौका अगले दिन आया। सुबह, शालिनी बालकनी में कपड़े सुखा रही थी। पड़ोसी की खिड़की से वर्मा अंकल की नजर पड़ सकती थी। रोहन ने पीछे से आकर उसे गले लगा लिया। ‘मां, कल रात सो नहीं पाया। फिर से चाहता हूं।’ शालिनी ने देखा, वर्मा अंकल अपनी बालकनी में चाय पी रहे थे। खतरा फिर से उत्तेजना बढ़ा रहा था।

रोहन ने शालिनी को बालकनी की रेलिंग पर झुकाया। साड़ी ऊपर चढ़ाई और चड्डी नीचे कर दी। शालिनी की गांड नंगी हो गई। रोहन ने थप्पड़ मारा, ‘मां, तुम्हारी गांड कितनी रसीली है।’ फिर लंड को चूत में घुसेड़ दिया। डॉगिस्टाइल में खींचकर बाल पकड़े और जोरदार धक्के मारे। शालिनी ने मुंह दबाया, क्योंकि वर्मा अंकल की खिड़की से आवाज आ सकती थी। हवा में ठंडक थी, लेकिन उनके शरीर गर्म। रोहन ने रफ से पेला, हर बार बाल खींचकर सिर पीछे खींचा। शालिनी की चूत कसकर लंड को चूस रही थी। ‘बेटा… अंकल देख लेंगे…’ लेकिन वह खुद उत्तेजित हो रही थी। रोहन ने स्पीड बढ़ाई, गांड पर थप्पड़ मारते हुए। आखिर में, वह चूत में झड़ गया। शालिनी ने जल्दी कपड़े ठीक किए, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की लाली थी।

दोपहर में, घर पर एक छोटी सी पार्टी थी। वर्मा अंकल और कुछ पड़ोसी आए थे। सब लिविंग रूम में बैठे थे, हंसी-मजाक चल रहा था। शालिनी सर्विंग कर रही थी। रोहन किचन में गया और मां को बुलाया। ‘मां, आओ न।’ शालिनी आई, लेकिन बाहर लोगों की आवाजें थीं। रोहन ने दरवाजा बंद नहीं किया, बस थोड़ा सा खुला छोड़ दिया। खतरे का रोमांच फिर शुरू।

रोहन ने शालिनी को काउंटर पर बिठाया और साड़ी ऊपर चढ़ा दी। चूत पर मुंह लगा लिया, जीभ से चाटने लगा। शालिनी की टांगें कांपने लगीं। ‘बेटा, बाहर सब हैं…’ लेकिन रोहन ने नहीं सुनी। लंड बाहर निकाला और सीधे चूत में घुसा। स्टैंडिंग पोजिशन में रफ ठुकाई शुरू। बाल खींचकर सिर पीछे किया और होंठ चूसे। शालिनी ने कराह को दबाया। बाहर वर्मा अंकल की आवाज आई, ‘शालिनी जी, कहां हो?’ रोहन ने स्पीड बढ़ा दी, जोर से धक्के मारे। शालिनी ने चिल्लाने से खुद को रोका। रोहन ने डॉगिस्टाइल में घुमाया, काउंटर पर झुकाया और पीछे से पेला। बाल मुट्ठी में लपेटे, रफ से खींचा। चूत का रस टपक रहा था। आखिरकार, दोनों एक साथ झड़े। शालिनी ने सांस संभाली और बाहर चली गई, चाय लेकर।

शाम ढलते ही, रोहन ने मां को पार्किंग में कार में बिठा लिया। वर्मा अंकल का घर ठीक सामने था, उनकी लाइट जल रही थी। कार में अंधेरा था, लेकिन खतरा साफ। रोहन ने शालिनी की ब्लाउज खोली, स्तनों को मसलने लगा। ‘मां, आज रात और रफ करना है।’ शालिनी की सांसें तेज। रोहन ने पैंट उतारी और लंड को मुंह में ठूंस दिया। शालिनी ने चूसा, गले तक लिया। फिर रोहन ने उसे सीट पर झुकाया, डॉगिस्टाइल। बाल खींचे और गांड पर थप्पड़ मारे। लंड चूत में घुसा, जोरदार पेलाई। कार हिल रही थी। वर्मा अंकल की खिड़की से कोई भी देख सकता था। उत्तेजना चरम पर। रोहन ने रफ से धक्के दिए, शालिनी की चीखें दबी हुईं। ‘आह… बेटा… मार डालोगे…’ लेकिन वह पीछे धकेल रही थी। रोहन ने गांड में भी उंगली डाली, डबल पेनिट्रेशन जैसा। आखिर में, चूत में गरम वीर्य भरा।

रात को, बेडरूम में। वर्मा अंकल का घर पास ही था, उनकी टीवी की आवाज आ रही थी। रोहन ने मां को बिस्तर पर पटका। नंगी कर दिया। बाल खींचकर डॉगिस्टाइल में सेट किया। ‘मां, आज आखिरी बार, लेकिन सबसे रफ।’ लंड चूत में घुसा, जोर से ठोका। शालिनी की गांड लाल हो गई थप्पड़ों से। बाल खींचे, सिर पीछे। रोहन ने स्पीड बढ़ाई, बेड हिलने लगा। खतरे की वजह से दोनों पागल। शालिनी ने चीखी, ‘हां बेटा, फाड़ दो चूत को!’ रोहन ने गांड में भी लंड डाला, अल्टरनेट। रफ एनल और वैजाइनल। आखिर में, दोनों थककर लेट गए, लेकिन उत्तेजना बनी रही।

अगले दिन, सुबह की चाय पर। वर्मा अंकल फिर आए। लेकिन अब शालिनी और रोहन की नजरें मिलीं, मुस्कान के साथ। उनका राज सुरक्षित था, लेकिन खतरा उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। हर बार, हर जगह, उत्तेजना दोगुनी।

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