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सूरज ढलने लगा था जब राहुल और उसकी पत्नी प्रिया जंगल के रास्ते पर ट्रेकिंग कर रहे थे। वे दोनों शहर की भागदौड़ से दूर एक शांत छुट्टी बिताने के लिए यहां आए थे। जंगल घना था, हरी-भरी पत्तियां हवा में सरसराती हुईं, और दूर कहीं नदी का बहाव सुनाई दे रहा था। राहुल प्रिया का हाथ थामे हुए था, दोनों हंसते-जोकर बातें कर रहे थे। प्रिया की साड़ी हल्की हवा में लहरा रही थी, जो उसके गोरे शरीर को और आकर्षक बना रही थी।
‘राहुल, ये जगह कितनी शांत है! लगता है हम अकेले ही हैं यहां,’ प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा। राहुल ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोला, ‘हां, बस हम दोनों। चलो, नदी किनारे रुकते हैं। थोड़ा पानी पी लें।’
वे नदी के किनारे पहुंचे। नदी का पानी साफ और ठंडा था। प्रिया ने अपना बैग उतारा और नदी में पैर डुबोने लगी। राहुल थोड़ा दूर जाकर पानी भरने लगा। तभी अचानक जंगल से कुछ आवाजें आईं। राहुल ने कान लगाए, लेकिन कुछ समझ नहीं आया। ‘शायद जानवर होंगे,’ उसने सोचा और प्रिया की ओर लौटा।
लेकिन जैसे ही वह मुड़ा, चार-पांच आदमियों का एक समूह जंगल से निकल आया। वे स्थानीय लग रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर एक अजीब सी भूख थी। उनके कपड़े गंदे थे, और हाथों में लाठियां थीं। लीडर एक लंबा, काला आदमी था, जिसके चेहरे पर दाढ़ी थी। ‘अरे, ये तो शहर वाले लगते हैं,’ उसने हंसते हुए कहा। बाकी ने भी हंसना शुरू कर दिया।
प्रिया डर गई और राहुल के पास आ गई। ‘राहुल, ये कौन हैं?’ उसने फुसफुसाते हुए पूछा। राहुल ने उन्हें घूरा और बोला, ‘भाई, हम सिर्फ घूमने आए हैं। कुछ मतलब नहीं है। चले जाओ।’ लेकिन वे नहीं माने। लीडर ने आगे बढ़ते हुए कहा, ‘घूमने आए हो? तो थोड़ा मजा भी तो लो। ये औरत कितनी हसीन है!’ उसके साथियों ने प्रिया को ऊपर से नीचे तक देखा।
राहुल ने प्रिया को पीछे धकेला और चिल्लाया, ‘पीछे हटो!’ लेकिन वे तेज थे। दो आदमियों ने राहुल को पकड़ लिया और उसे नदी किनारे की झाड़ियों में घसीट लिया। राहुल ने विरोध किया, लेकिन उनकी ताकत के आगे वह बेबस था। वे उसे बांध दिया और मुंह पर कपड़ा ठूंस दिया। ‘चुप रहो, बस देखो,’ एक ने कहा।
प्रिया चीखी, ‘राहुल! छोड़ दो उसे!’ लेकिन लीडर ने उसे पकड़ लिया। उसके हाथ प्रिया के कंधों पर थे, और वह उसे जंगल की ओर खींचने लगा। बाकी तीन आदमी उसके चारों ओर घेरा बना लिए। नदी का किनारा अब खाली था, सिर्फ प्रिया की चीखें गूंज रही थीं। राहुल झाड़ियों से सब देख रहा था, उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वह कुछ कर नहीं पा रहा था, बस देखने को मजबूर था।
वे प्रिया को जंगल के एक खुले मैदान में ले गए, जहां घास नरम थी। लीडर ने प्रिया की साड़ी का पल्लू खींच लिया। प्रिया ने हाथ-पैर मारकर विरोध किया, लेकिन एक आदमी ने उसके हाथ पकड़ लिए। ‘बस शांत हो जा, रंडी! मजा लेगी तू,’ लीडर ने गंदे शब्दों में कहा। प्रिया रोने लगी, ‘नहीं, छोड़ दो! प्लीज!’ लेकिन वे नहीं रुके।
लीडर ने प्रिया की ब्लाउज फाड़ दी। उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए, जो हवा में कांप रहे थे। एक आदमी ने तुरंत उसके एक स्तन को मुट्ठी में भर लिया और जोर से दबाया। प्रिया चीखी, लेकिन मुंह पर हाथ रख दिया गया। लीडर ने अपनी पैंट उतारी और अपना मोटा लंड बाहर निकाला। वह काला और लंबा था, सिरा चमक रहा था। ‘देख, ये तेरे लिए है,’ उसने कहा और प्रिया के चेहरे पर रगड़ने लगा।
प्रिया ने सिर हिलाया, लेकिन वे उसे दबोच लिया। लीडर ने अपना लंड प्रिया के मुंह में ठूंस दिया। प्रिया गैग करने लगी, लेकिन वह जोर-जोर से धक्के मारने लगा। ‘चूस, साली! अच्छे से चूस!’ उसके साथी हंस रहे थे। एक ने प्रिया की साड़ी पूरी खींच ली, अब वह सिर्फ अंडरवियर में थी। दूसरे ने उसके पैर फैलाए और चूत पर हाथ फेरा। प्रिया की चूत गीली हो गई थी डर से, लेकिन वे इसे मजाक उड़ा रहे थे।
राहुल नदी किनारे से सब देख रहा था। उसकी आंखें नम थीं, लेकिन शरीर जकड़ा हुआ था। वह चिल्लाना चाहता था, लेकिन मुंह बंद था। प्रिया की चीखें उसके कानों में गूंज रही थीं। लीडर अब प्रिया के मुंह से लंड निकाल चुका था और नीचे आ गया। उसने प्रिया का अंडरवियर फाड़ दिया। प्रिया की चूत नंगी हो गई, गुलाबी और चिकनी। लीडर ने अपना लंड प्रिया की चूत पर रगड़ा और एक झटके में अंदर डाल दिया।
प्रिया की चीख जंगल में गूंजी। ‘आह! दर्द हो रहा है! निकालो!’ लेकिन लीडर ने तेज-तेज चोदना शुरू कर दिया। उसका मोटा लंड प्रिया की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, खून और रस मिलकर बह रहे थे। साथी एक ने प्रिया के स्तनों को चूसना शुरू किया, दांतों से काटते हुए। दूसरा आदमी अपना लंड निकालकर प्रिया के हाथ में पकड़ा दिया और हिलाने को कहा। प्रिया रो रही थी, लेकिन वे जबरदस्ती करवा रहे थे।
अब बारी आई दूसरे की। लीडर ने प्रिया को उल्टा कर दिया और उसके गांड पर थप्पड़ मारा। ‘अब गांड मारेंगे तेरी,’ उसने कहा। प्रिया डर गई, ‘नहीं, प्लीज! वहां नहीं!’ लेकिन वे नहीं माने। एक ने प्रिया की गांड फैलाई और अपना लंड थूक लगाकर अंदर ठूंस दिया। प्रिया की चीख ऐसी थी मानो जंगल फट जाए। लंड गांड में घुसा, खून बहने लगा। वह जोर-जोर से पेल रहा था, प्रिया का शरीर कांप रहा था।
तीसरा आदमी प्रिया के मुंह में लंड डाल दिया। अब प्रिया तीनों छेदों से भरी हुई थी। लीडर नीचे चूत में, एक गांड में, और एक मुंह में। वे बारी-बारी से धक्के मार रहे थे। प्रिया का शरीर पसीने और रस से भीगा हुआ था। उसके स्तन लटक रहे थे, और वे उन्हें पकड़कर खींच रहे थे। ‘चोदो इसे जोर से! रंडी है ये!’ वे चिल्ला रहे थे।
राहुल देखते-देखते थक गया था। उसका लंड भी खड़ा हो गया था, लेकिन वह खुद को कोस रहा था। प्रिया अब थक चुकी थी, उसकी चीखें कम हो गईं। वे उसे घुमाते रहे, कभी चूत में, कभी गांड में, कभी मुंह में। एक ने प्रिया की चूत में झड़ दिया, गर्म वीर्य बहने लगा। दूसरा उसके मुंह में। प्रिया खांस रही थी, लेकिन वे हंस रहे थे।
चौथा आदमी अब आया। उसने प्रिया को घास पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। उसका लंड सबसे लंबा था। वह प्रिया की चूत में घुसा और पूरी ताकत से चोदने लगा। प्रिया की टांगें हवा में लटक रही थीं। ‘आह… आह…’ अब उसकी आवाज में दर्द के साथ कुछ और था। वे सब मिलकर प्रिया के शरीर पर थूक रहे थे, उसके बाल खींच रहे थे। एक ने उसके स्तनों पर काट लिया, निशान बन गए।
समूह ने प्रिया को घंटों तक चोदा। वे बारी-बारी से उसके हर हिस्से का इस्तेमाल कर रहे थे। कभी दो एक साथ चूत और गांड में, कभी मुंह और हाथ। प्रिया का शरीर लाल हो गया था, चूत और गांड फूल गई थीं। वीर्य हर जगह बह रहा था—उसके चेहरे पर, स्तनों पर, चूत से बाहर। वे उसे गाली देते रहे, ‘साली, कितनी टाइट है तेरी चूत! शहर वाली रंडियां ऐसी ही होती हैं।’
आखिरकार, जब सूरज पूरी तरह डूब गया, वे थक गए। लीडर ने आखिरी बार प्रिया की चूत में झड़ दिया और उठा। ‘बस, अब जा। लेकिन याद रखना, ये हमारा जंगल है।’ वे हंसते हुए चले गए। प्रिया नंगी लेटी रही, रोते हुए। राहुल ने बंधन तोड़ने की कोशिश की और आखिरकार खुद को आजाद किया। वह दौड़कर प्रिया के पास गया।
‘प्रिया! मैं… मैं कुछ कर न सका,’ राहुल रोते हुए बोला। प्रिया ने उसे देखा, उसकी आंखें खाली थीं। ‘राहुल… सब खत्म हो गया,’ उसने फुसफुसाया। राहुल ने उसे गले लगाया, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी जलन थी। जंगल की रात अब और काली हो गई थी। नदी का पानी चुपचाप बह रहा था, जैसे कुछ हुआ ही न हो। लेकिन उनके जीवन में एक घाव बन गया था, जो कभी न भरने वाला था।
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