Maa ko Mere Tuition teacher ne pataya aur Choda

मेरा नाम राहुल है। मैं एक साधारण सा लड़का हूँ, जो अपनी पढ़ाई में थोड़ा कमजोर था। घर में माँ और मैं ही रहते थे, क्योंकि पापा की नौकरी के कारण वो दूसरे शहर में रहते थे। माँ का नाम सीमा था, उम्र करीब 38 साल, लेकिन वो इतनी खूबसूरत थीं कि देखने वाले सोचते कि कोई 28-30 साल की औरत हैं। उनका फिगर कमाल का था – 36-28-38, लंबे काले बाल, गोरी रंगत और हमेशा साड़ी पहनने की आदत। माँ घर संभालती थीं और कभी-कभी पड़ोसियों के लिए सिलाई का काम भी करतीं। लेकिन उनकी जिंदगी में एक खालीपन था, क्योंकि पापा महीनों घर नहीं आते थे।

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मुझे गणित में दिक्कत हो रही थी, इसलिए माँ ने एक ट्यूशन टीचर रखा। उसका नाम राजेश सर था। वो करीब 35 साल का था, लंबा कद, मस्कुलर बॉडी और हमेशा साफ-सुथरा दिखता। पहली बार जब वो घर आया, तो माँ ने चाय दी और बातें कीं। मैंने नोटिस किया कि राजेश सर माँ को देखकर थोड़ा घूर रहे थे। माँ ने भी उनकी तारीफ की, ‘वाह, सर इतने फिट लगते हैं।’ राजेश सर ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘आंटी, आप भी तो कमाल की लगती हैं।’ मैंने सोचा शायद सामान्य बातचीत है।

ट्यूशन शुरू हुई। हर शाम 6 बजे राजेश सर आते। पहले हफ्ते सब ठीक था। लेकिन धीरे-धीरे मैंने देखा कि सर माँ से ज्यादा बातें करने लगे। कभी माँ के साड़ी के कलर की तारीफ, कभी उनकी सिलाई के बारे में पूछते। माँ भी हँसने लगीं। एक दिन, जब मैं ट्यूशन के बीच में पानी पीने गया, तो लौटकर देखा कि राजेश सर माँ के पास खड़े होकर कुछ फुसफुसा रहे थे। माँ शरमा गईं। मैंने कुछ नहीं कहा।

एक शाम, ट्यूशन के बाद राजेश सर चाय पीने के लिए रुक गए। माँ ने बनाई चाय दी। बातों-बातों में सर ने कहा, ‘सीमा जी, आप इतनी अकेली रहती हैं, पति जी कब आते हैं?’ माँ ने उदास होकर कहा, ‘महीनों हो गए।’ सर ने सहानुभूति दिखाई और अपना हाथ माँ के कंधे पर रख दिया। माँ ने हल्का सा हटा लिया, लेकिन मुस्कुराईं। मैं कमरे में था, लेकिन ध्यान नहीं दिया।

अगले दिन, ट्यूशन के दौरान सर ने मुझसे कहा, ‘राहुल, आज थोड़ा जल्दी खत्म करते हैं।’ मैं खुश हो गया। जैसे ही मैं होमवर्क लेकर चला गया, सर माँ के पास गए। मैं चुपके से दरवाजे से झाँका। सर माँ को दीवार से सटा रहे थे। ‘सीमा, तुम्हें पता है, पहली नजर से ही तुम्हें चाहने लगा हूँ।’ माँ ने विरोध किया, ‘नहीं सर, ये गलत है। राहुल है अंदर।’ लेकिन सर ने उनके होंठ पर उंगली रख दी। फिर धीरे से माँ के गाल पर किस किया। माँ की साँसें तेज हो गईं। सर ने माँ की साड़ी की चुन्नी सरका दी और गर्दन चूमने लगे। माँ की आँखें बंद हो गईं।

उस रात माँ थकी-थकी सी लग रही थीं। लेकिन अगले दिन फिर वही हुआ। ट्यूशन खत्म होते ही सर माँ को किस करने लगे। इस बार माँ ने ज्यादा विरोध नहीं किया। सर ने माँ के ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा के ऊपर से चूचियाँ दबाईं। माँ सिसकारी भरने लगीं, ‘आह… राजेश… मत करो।’ लेकिन उनका शरीर काँप रहा था। सर ने माँ की साड़ी खींची और पेट पर किस करते हुए नाभि में जीभ डाली। माँ की चूत गीली हो गई। सर ने हाथ नीचे सरका दिया और पैंटी के ऊपर से रगड़ने लगे। ‘सीमा, कितनी गर्म हो गई हो।’ माँ ने आखिरकार हार मान ली और सर को गले लगा लिया।

धीरे-धीरे ये सिलसिला बढ़ता गया। हर ट्यूशन के बाद सर माँ को चूमते, सहलाते। एक दिन, मैं स्कूल से जल्दी आ गया। घर पहुँचकर देखा कि लिविंग रूम में माँ और सर थे। माँ की साड़ी खुली पड़ी थी, सर माँ को गोद में बिठाकर चूस रहे थे। माँ की चूचियाँ बाहर थीं, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। सर जोर-जोर से चूस रहे थे, ‘मम्मी… कितनी रसीली हैं।’ माँ सिर पकड़कर दबा रही थीं, ‘हाँ राजेश… चूसो… कितने दिन हो गए किसी को।’ मैं डर गया, लेकिन छिपकर देखता रहा। सर ने माँ को सोफे पर लिटाया और साड़ी पूरी खींच ली। माँ नंगी हो गईं। उनकी गोरी चूत साफ दिख रही थी, बाल कम थे। सर ने जीभ डालकर चाटना शुरू किया। माँ चीखी, ‘आह… राजेश… वहाँ… हाँ।’ सर की जीभ माँ की चूत में घुस रही थी, क्लिट को चूस रहे थे। माँ का पानी बहने लगा।

फिर सर ने अपना पैंट उतारा। उनका लंड बाहर आया – मोटा, लंबा, कम से कम 8 इंच का। माँ ने देखा और आँखें फेर लीं, लेकिन सर ने माँ के हाथ में पकड़ा दिया। ‘सीमा, इसे सहलाओ।’ माँ ने हिचकिचाते हुए सहलाना शुरू किया। सर ने माँ के मुँह के पास लंड रखा, ‘चूसो।’ माँ ने पहले होंठ चूमा, फिर मुंह में ले लिया। सर ने माँ के सिर को पकड़कर धक्के देने लगे। माँ गग कर रही थीं, लेकिन चूसती रहीं। लंड माँ के गले तक जा रहा था। सर बोले, ‘हाँ सीमा… अच्छा ब्लोजॉब दे रही हो।’ 10 मिनट तक चूसने के बाद सर ने माँ को लिटाया और चूत पर लंड रगड़ा। ‘सीमा, तैयार हो?’ माँ ने सिर हिलाया। सर ने एक झटके में लंड अंदर डाल दिया। माँ चीखी, ‘आह… दर्द हो रहा है… कितना मोटा है।’ सर ने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया।

माँ की चूत लंड को निगल रही थी। सर जोर-जोर से ठोक रहे थे, ‘सीमा… कितनी टाइट है तेरी चूत… पति का लंड छोटा होगा।’ माँ कराह रही थीं, ‘हाँ… तेरी तरह नहीं… चोदो राजेश… जोर से।’ कमरा ‘पच-पच’ की आवाजों से गूँज रहा था। सर ने माँ की टाँगें कंधे पर रखीं और गहराई तक चोदने लगे। माँ के चूचियाँ उछल रही थीं। 15 मिनट बाद सर बोले, ‘सीमा… झड़ने वाला हूँ।’ माँ ने कहा, ‘अंदर ही डाल दो… गर्भनिरोधक खा लूँगी।’ सर ने आखिरी धक्का मारा और माँ की चूत में वीर्य उंडेल दिया। माँ भी ऑर्गेज्म पर पहुँच गईं, शरीर काँपने लगा।

मैं चुपके से भाग गया। लेकिन ये पहली बार नहीं था। उसके बाद हर दिन ट्यूशन के बहाने सर माँ को चोदते। कभी किचन में, कभी बेडरूम में। एक दिन, माँ ने मुझे बताया कि सर अच्छे हैं, लेकिन मैं कुछ कह न सका। धीरे-धीरे माँ सर के साथ और खुल गईं। वो सर को ‘जान’ कहने लगीं। सर ने माँ को डॉगी स्टाइल में चोदा, गांड पर थप्पड़ मारे। माँ चिल्लाई, ‘हाँ… मारो… चोदो मेरी गांड।’ सर ने उंगली से गांड में डाला, फिर लंड घुसाया। माँ दर्द से रोई, लेकिन मजा लेने लगी।

एक रात, पापा फोन पर थे। माँ बात कर रही थीं, लेकिन सर पीछे से चोद रहे थे। माँ सिसकियाँ दबा रही थीं, ‘हाँ जी… सब ठीक है… आह।’ सर हँस रहे थे। माँ का चेहरा लाल हो गया। उसके बाद माँ सर की गुलाम हो गईं। वो सर के लिए नई साड़ियाँ खरीदतीं, अंदरूनी कपड़े। सर ने माँ को ग्रुप में ले जाने की बात की, लेकिन माँ मना कर दीं। लेकिन घर में अकेले में सब कुछ करने लगीं।

मेरी पढ़ाई सुधर गई, लेकिन घर का माहौल बदल गया। माँ खुश रहने लगीं। सर अब सप्ताह में तीन बार आते, ट्यूशन कम, चुदाई ज्यादा। एक दिन मैंने देखा कि सर माँ को बांधकर चोद रहे थे। माँ की आँखें पट्टी बंधी, हाथ बंधे। सर चाबुक से हल्का सा मार रहे थे, ‘कहो, कौन मेरा है?’ माँ बोलीं, ‘तुम्हारा राजेश… चोदो अपनी रंडी को।’ सर ने चूत और गांड दोनों में लंड डाला, बारी-बारी। माँ कई बार झड़ीं।

समय बीतता गया। पापा आए, लेकिन माँ ने सर से ब्रेक लिया। लेकिन जैसे ही पापा गए, फिर शुरू। अब माँ सर को प्यार करने लगीं। उन्होंने कहा, ‘राजेश, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।’ सर ने मुस्कुराकर कहा, ‘सीमा, तुम मेरी हो। राहुल की पढ़ाई के बहाने मैं आता रहूँगा।’ और चुदाई जारी रही। माँ की चूत हमेशा गीली रहती, सर का लंड हमेशा तैयार। उनका रिश्ता गहरा होता गया, और मैं चुपचाप देखता रहा, अपनी माँ की खुशी देखकर।

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