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Sasur ne bahu ko choda 1

मेरा नाम अदिति है, और मैं 27 साल की एक शादी शुदा लड़की हूं। मेरा रंग दूध जैसा गोरा है, और मेरा फिगर 34-29-36 है। मेरी शादी 2 साल पहले हुई थी, और ये कहानी भी तभी शुरू हो गई थी।

2 साल पहले मेरी अर्जुन नाम के लड़के के साथ अरेंज मैरिज हुई थी। मेरे ससुराल में मेरे ससुर और मेरे पति ही थे। मेरे पति का एक छोटा भाई था, लेकिन उसकी एक कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो चुकी थी। मेरी सासू मां 3 साल पहले गुज़र चुकी थी। तो अब हम 3 लोग ही थे घर में।

हम तीनों के अलावा घर में एक कामवाली भी थी, जिसका नाम प्रीति था। प्रीति 19 साल की लड़की थी, जो पिछले 1 साल से हमारे घर में काम कर रही थी। प्रीति का रंग गोरा था, और फिगर उसका 32-26-34 होगा। नैन-नक्श अच्छे थे उसके, और वो चुलबुले टाइप की थी।

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मैं नई-नई घर में आई थी, तो मेरे पति और मेरे ससुर मेरा बहुत ख्याल रखते थे। मुझे किसी चीज की कमी नहीं होने देते थे। शादी से पहले मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था, तो मेरे किसी के साथ शारीरिक संबंध नहीं बने थे। हां मैंने अपनी सहेलियों से सुना ज़रूर था कि सेक्स में मज़ा बहुत आता है।

शादी वाली रात जब मेरे पति ने मुझे चोदा, तो मेरी कुंवारी चूत फटने की वजह से मुझे दर्द तो जरूर हुआ, लेकिन मुझे कुछ ज्यादा मजा नहीं आया। मैंने सोचा शायद ये पहली बार था, इसलिए ऐसा हुआ होगा। लेकिन फिर ये बार-बार होने लगा। मेरे पति मुझे हर रोज चोदते थे, लेकिन मुझे मजा नहीं आता था।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा था। अंत में मैंने सोचा कि शायद मेरी सहेलियों ने मुझे झूठ कहा होगा, और सेक्स में उतना मजा नहीं आता होगा, जितना उन्होंने मुझे कहा था। लेकिन फिर एक दिन मेरी जिंदगी में एक नया मोड़ आया।

मैं हाल में बैठी चाय पी रही थी, और ससुर जी और मैं बातें कर रहे थे। तभी मैंने गौर किया, कि ससुर जी बातें तो मुझसे कर रहे थे, लेकिन उनकी नज़र बार-बार प्रीति की तरफ जा रही थी। फिर मैंने प्रीति की तरफ देखा, तो वो आटा गूंथ रही थी। वो नीचे बैठ कर आटा गूंथ रही थी, और आगे की तरफ झुकने की वजह से उसके बूब्स दिख रहे थे।

प्रीति ने लेगिंग्स और कुर्ती पहनी हुई थी। उसकी कुर्ती का गला डीप था, तो उसके बूब्स का एक अच्छा नज़ारा देखने को मिल रहा था। फिर मैंने ससुर जी की तरफ देखा तो उनकी नज़र प्रीति के बूब्स को गहराई में जा रही थी। तभी मेरी नज़र दोबारा प्रीति पर पड़ी। मैंने नोटिस किया, कि वो जान-बूझ कर बार-बार नीचे झुक रही थी, जबकि इसकी कोई जरूरत भी नहीं थी।

मैं समझ गई कि वो ससुर जी को अपने बूब्स दिखाने के लिए ही ऐसा कर रही थी, और ससुर जी भी इस चीज का मज़ा ले रहे थे। मुझे ये देख कर गुस्सा आ रहा था कि कैसे एक बूढ़ा आदमी एक जवान लड़की को ऐसे हवस भरी नज़र से देख रहा था। लेकिन मेरे अंदर एक उत्तेजना भी पैदा हो रही थी।

उस दिन के बाद मैंने उन दोनों पर नज़र रखनी शुरू कर दी। मैंने देखा कि उन दोनों का कामुकता भरा खेल हर वक्त चलता रहता था। ससुर जी आते-जाते प्रीति को छू कर मजा लेते रहते थे। कभी वो उसकी पीठ पर हाथ फेर देते थे, और कभी रसोई में जाके उसके चूतड़ दबा देते थे। कभी जान-बूझ कर उसके पीछे जाके खड़े हो जाते थे, जिससे प्रीति की गांड उनके लंड से टकरा जाए।

मैंने ये भी देखा कि प्रीति भी इस चीज में उनका पूरा साथ दे रही थी। उसके चेहरे पर को भाव होते थे, वो किसी तरह की दिक्कत के नहीं थे, बल्कि खुशी, उत्तेजना, और मज़े वाले थे। फिर मैंने एक दिन सोचा कि क्यों ना इन दोनों को घर पर अकेले छोड़ कर देखूं कि ये कहां तक आगे बढ़ते है।

मेरे पति तो रोज ऑफिस जाते ही थे, मैं भी एक दिन सहेली के घर जाने का बहाना बना कर घर से निकल गई। मैं बाहर तो गई, लेकिन पीछे के दरवाज़े से वापस घर के अंदर आके छुप गई। मैंने देखा कि मेरे जाने के 5 मिनट बाद ससुर जी रसोई में गए, और प्रीति का हाथ पकड़ कर उसको कमरे में चलने के लिए बोलने लगे। तभी प्रीति बोली-

प्रीति: मालिक आप ये क्या कर रहे हो? मालकिन आ जायेंगी।

ससुर जी: वो अपनी सहेली के यहां गई है। 2 घंटे तक नहीं आएगी। तू आजा जल्दी, मेरा लंड बहुत दिनों से प्यासा है।

फिर ससुर जी प्रीति को अपने कमरे में ले गए, और मैं उनके कमरे के बाहर जाके खड़ी हो गई। कमरे में जाते ही ससुर जी ने प्रीति को अपनी बाहों में भर लिया, और उसके होंठ चूसने लगे। प्रीति भी उनका साथ देने लगी। प्रीति ने हमेशा की तरह लेगिंग्स और कुर्ती पहनी हुई थी।

होंठ चूसते हुए ससुर जी ने उसकी एक चूची पर हाथ रखा, और उसको दबाने लगे। इससे प्रीति की सांसे तेज़ होने लगी। उन दोनों को देख कर मेरी भी चूत में करंट सा लग रहा था। फिर ससुर जी ने प्रीति की कुर्ती और उसकी ब्रा एक साथ निकाल दिए, और उसकी चूची को मुंह में लेके चूसने लगे। ये देख कर मेरा हाथ अपने आप मेरी चूची पर चला गया और मैं उसको दबाने लग गई।

ससुर जी बड़े मजे से उसकी चूची चूस रहे थे दबा-दबा कर, जैसे आम चूस रहे हों। प्रीति भी आह आह करते हुए आहें भर रही थी। इधर मेरी भी चूत गीली हो रही थी। मेरे पति ने कभी इस तरह से मेरी चूची नहीं चूसी थी। फिर ससुर जी ने प्रीति को बिस्तर पर लिटा दिया, और उसका पेट चूमते हुए नाभि पर आ गए।

वो उसकी नाभि में जीभ डाल कर चूसने लगे, और मैं ये सोचने लगी की ऐसा भी होता है। उसके बाद ससुर जी ने प्रीति की लेगिंग्स को कमर से पकड़ा, और उसको पैंटी समेत नीचे उतार दिया। अब वो जवान लड़की ससुर जी के सामने नंगी थी। उसकी चूत पर बड़े हल्के बाल थे, और चूत काफी गीली भी हो चुकी थी। ससुर जी उसकी नंगी चूत को देख कर मुस्कुराने लगे।

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