गर्मियों की एक शाम थी, जब रवि अपने कमरे में खड़ा होकर आईने के सामने अपनी शादी की पोशाक ट्राई कर रहा था। कल ही उसकी बारात निकलने वाली थी। उसकी माँ, सुनीता, जो 42 साल की थीं, लेकिन उनकी लंबी काली जुल्फें और गोरा रंग उन्हें किसी जवान लड़की जैसी बना देता था। सुनीता ने रवि के लिए सारी तैयारियां की थीं। वो हमेशा से अपने इकलौते बेटे पर जान छिड़कती थीं। पिता की मौत के बाद तो रवि ही उनका सब कुछ था।
सुनीता कमरे में आईं, उनके हाथ में शेरवानी थी। “बेटा, ये पहनकर देखो, कैसी लगेगी।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। रवि ने शेरवानी पहनी और घूमकर दिखाया। सुनीता की नजरें उसके मजबूत कंधों पर ठहर गईं। रवि 25 साल का जवान था, जिम जाने से उसका शरीर चुस्त-दुरुस्त था। सुनीता ने उसके करीब आकर कोलर ठीक किया, उनकी उंगलियां उसके गले पर छू गईं। एक अजीब सी सिहरन हुई दोनों को। “माँ, तुम्हें कैसी लगी?” रवि ने पूछा। सुनीता ने जवाब दिया, “बहुत सुंदर लग रहे हो, बेटा। कल दुल्हन के सामने चले जाओगे, लेकिन आज रात… आज रात हम अकेले हैं।”
रात गहराने लगी। घर में कोई और नहीं था, ननद-भाई सब शादी की तैयारियों में व्यस्त थे। सुनीता ने रसोई में खाना बनाया, लेकिन उनका मन कहीं और था। खाने के बाद वो रवि के कमरे में गईं। रवि बिस्तर पर लेटा टीवी देख रहा था। सुनीता ने दरवाजा बंद किया और उसके बगल में बैठ गईं। उनकी लंबी जुल्फें खुले थे, जो कमर तक लहरा रही थीं। “बेटा, शादी के बाद सब बदल जाएगा। माँ को कौन याद रखेगा?” उन्होंने उदास स्वर में कहा। रवि ने उनका हाथ पकड़ा, “माँ, तुम हमेशा मेरी हो।”
अचानक सुनीता ने रवि को अपनी ओर खींच लिया। उनके होंठ उसके होंठों से मिल गए। रवि स्तब्ध था, लेकिन माँ की गर्माहट में वो बह गया। वो दोनों किस करने लगे, जुनून में। सुनीता ने रवि की शर्ट उतार दी, उसके छाती पर हाथ फेरा। रवि ने भी माँ की साड़ी खींची, ब्लाउज खोल दिया। सुनीता के बड़े स्तन बाहर आ गए, गुलाबी निप्पल्स तन चुके थे। रवि ने उन्हें चूसा, जोर से काटा। सुनीता चीखी, लेकिन आनंद से। “बेटा, माँ को चोदो… आज रात माँ तुम्हारी दुल्हन है।”
रवि ने सुनीता को बिस्तर पर पटक दिया। उसने अपनी पैंट उतारी, उसका लंड कड़ा हो चुका था, मोटा और लंबा। सुनीता ने उसे हाथ में पकड़ा, सहलाया। “इसे माँ की चूत में डालो।” रवि ने माँ की साड़ी ऊपर चढ़ाई, पैंटी फाड़ दी। सुनीता की चूत गीली थी, बालों से ढकी। रवि ने अपना लंड अंदर धकेला, जोर से। सुनीता चीखी, “आह… बेटा, धीरे…” लेकिन रवि रुका नहीं। वो तेजी से पेलने लगा, हर धक्के में गहरा। सुनीता के स्तन उछल रहे थे। रवि ने उसके बाल पकड़े, जो लंबे थे, उन्हें पीछे खींचा। सुनीता का सिर पीछे झुक गया, दर्द और सुख का मिश्रण। “माँ, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है!” रवि गरजा।
वो डॉगी स्टाइल में आ गया। सुनीता घुटनों पर थी, गांड ऊपर। रवि ने उसके बालों को पॉनीटेल बना लिया, जोर से खींचा और लंड चूत में घुसेड़ा। हर धक्के के साथ बाल खिंचते, सुनीता की चीखें कमरे में गूंजीं। “हाँ बेटा, खींचो माँ के बाल… चोदो जोर से!” रवि ने स्पैंक किया उसकी गांड पर, लाल निशान पड़ गए। वो तेजी से पेलता रहा, पसीना टपक रहा था। आखिरकार, रवि ने चूत में ही झड़ दिया, गर्म वीर्य भर दिया। सुनीता भी कांपकर orgasam में डूब गई।
लेकिन ये पहली बार था। सुनीता ने कहा, “बेटा, अभी रात बाकी है। चलो, बाहर बगीचे में।” घर का पिछवाड़ा बगीचा था, रात के अंधेरे में। वो दोनों नंगे होकर बाहर निकले। हवा ठंडी थी, लेकिन उनके शरीर गर्म। बगीचे के घास पर सुनीता लेट गई, रवि उसके ऊपर चढ़ा। इस बार वो मिशनरी में चोदा, लेकिन बाल खींचते हुए। सुनीता के लंबे बाल घास में बिखर गए। रवि ने लंड चूत में डाला, जोर-जोर से ठोकने लगा। बाहर होने से डर था, लेकिन उत्तेजना ज्यादा। “किसी ने देख लिया तो?” सुनीता फुसफुसाई। “देख ले, माँ को चोद रहा हूँ मैं।” रवि ने हंसकर कहा। वो तेज चुदाई करता रहा, सुनीता की चीखें दबाने के लिए अपना मुंह उसके मुंह पर रखा। फिर डॉगी में बदला, बाल पकड़कर खींचा। पॉनीटेल बनाकर घोड़े की तरह सवारी की। रवि ने गांड पर थप्पड़ मारे, चूत में लंड घुमाया। सुनीता की चूत से रस टपक रहा था। आखिर में, रवि ने बाहर निकालकर उसके चेहरे पर झाड़ दिया, गर्म वीर्य की धार।
सुबह होने से पहले, सुनीता ने कहा, “बेटा, एक बार और… लेकिन कहीं और।” वो दोनों घर से निकले, पास के जंगल की ओर। सुबह का धुंधला अंधेरा था। जंगल में एक पेड़ के नीचे पहुंचे। सुनीता ने अपना घाघरा ऊपर किया, रवि ने पीछे से चूत में लंड डाल दिया। डॉगी स्टाइल, बाल खींचते हुए। जंगल की शांति में उनकी चुदाई की आवाजें गूंजीं। “आह… बेटा, यहाँ तो खुला है, कोई आ गया तो?” सुनीता बोलीं। “चलो, माँ, और जोर से चोदूँगा।” रवि ने बालों को पॉनीटेल में बांध लिया, जोर से खींचा। उसका लंड चूत को चीरता हुआ अंदर-बाहर। सुनीता की गांड लाल हो गई स्पैंक्स से। रवि ने एक हाथ से उसके स्तन मसले, निप्पल्स चूसे। चुदाई इतनी कठोर थी कि सुनीता के घुटने कांपने लगे। रवि ने स्पीड बढ़ाई, हर धक्का गहरा। सुनीता orgasam में चीखी, चूत सिकुड़ गई। रवि ने भी झड़ दिया, वीर्य चूत में भर दिया।
दोपहर में, शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन सुनीता और रवि को फुर्सत मिली। वो घर के ऊपरी कमरे में चले गए, जहां बालकनी थी। बालकनी से सड़क दिख रही थी, लेकिन पर्दे लगे थे। सुनीता ने रवि को दीवार से सटा दिया, उसका लंड निकाला और मुंह में ले लिया। ब्लोजॉब देते हुए, वो गहरी तक ले गई। रवि ने उसके बाल पकड़े, सिर को आगे-पीछे किया। “माँ, चूसो जोर से।” सुनीता ने चूसा, लंड चाटा। फिर रवि ने उसे बालकनी की रेलिंग पर झुकाया, डॉगी स्टाइल। बाल खींचे, पॉनीटेल बनाकर। लंड चूत में घुसेड़ा, तेजी से पेला। नीचे से आवाजें आ रही थीं, लेकिन वो रुके नहीं। कठोर धक्के, स्पैंक्स, बाल खींचना। सुनीता की चीखें दबी हुईं। रवि ने गांड में उंगली डाली, डबल पेनिट्रेशन जैसा। सुनीता पागल हो गई, “बेटा, फाड़ दो माँ को!” रवि ने चूत में झाड़ दिया, वीर्य बहने लगा।
शाम ढलते-ढलते, वो दोनों नदी किनारे पहुंचे। शादी की रस्में बाद में थीं। नदी का किनारा सुनसान था, लेकिन खुला। सुनीता ने कपड़े उतारे, नंगी हो गई। उसके लंबे बाल हवा में लहरा रहे थे। रवि ने उसे घास पर लिटाया, लेकिन फिर डॉगी में। बाल पकड़े, खींचे। लंड चूत में डाला, जोर से ठोका। पानी की आवाज के साथ उनकी चुदाई। “यहाँ तो सब देख सकते हैं, बेटा।” सुनीता बोलीं। “हाँ माँ, ओपन सेक्स… और मजा आ रहा है।” रवि ने स्पीड बढ़ाई, बालों को पॉनीटेल में बांधकर खींचा। उसकी गांड पर थप्पड़, स्तनों पर चोट। कठोर सेक्स, रवि ने उसे पलटा, मिशनरी में चोदा, बाल खींचते हुए। सुनीता के नाखून उसके पीठ पर। orgasam के बाद, रवि ने मुंह में झाड़ दिया, सुनीता ने निगल लिया।
रात हो गई। शादी से पहले की आखिरी रात। घर लौटकर, बेडरूम में। सुनीता ने पॉनीटेल बनाई, रवि को बुलाया। “बेटा, आज अंतिम बार… कल दुल्हन के पास जाओगे।” रवि ने माँ को बिस्तर पर पटका, लंड बाहर निकाला। पहले ब्लोजॉब, फिर चूत में। डॉगी, बाल खींचना, स्पैंक्स। कठोर धक्के, सुनीता चीखती रही। रवि ने गांड में भी डाला, पहली बार। सुनीता दर्द से कराही, लेकिन बोली, “चोदो बेटा, सब कुछ दो।” रवि ने गांड पेली, बाल खींचे। फिर चूत में वापस, झाड़ा। दोनों थककर लिपट गए।
सुनीता ने फुसफुसाया, “बेटा, शादी के बाद भी आना माँ के पास।” रवि ने हामी भरी। रात भर वो सोते-जागते चुदाई करते रहे, लेकिन कठोरता कम हो गई। सुबह, रवि तैयार हो गया, लेकिन उसके मन में माँ की यादें बसी थीं। शादी हुई, लेकिन वो रिश्ता कभी न टूटा।
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