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Maa ko Uncle ne fir teacher ne fir dost ne choda 2

मैं चुपके से माँ के कमरे के बहार खड़ा हूँ दरवाज़ा थोड़ा सा खुला छोड़ दिया है रोहन ने जाते-जाते. अंदर से आवाज़ें आ रही हैं माँ की हलकी सी सिसकियाँ और बीएड के हिलने की आवाज़. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा है हाथ पसीने से भीग गया है. मैं जानता हूँ की अंदर क्या हो रहा है पर रुक नहीं प् रहा. वोयर बन गया हूँ मैं अपनी ही माँ की चुदाई सुन रहा हूँ जैसे कोई गन्दा सपना. रोहन अभी पूरा नहीं हुआ शायद माँ को और तड़पा रहा है. मैं दीवार से चिपक कर कान लगा देता हूँ हर शब्द हर सिसकारी सुनाई दे रही है.अंदर रोहन की आवाज़ गूंजती है ‘आंटी अब मत रोया कर मज़ा ले ले. तेरी छूट तोह गीली हो गयी है मेरी चुदाई से.’ माँ की आवाज़ कांपती है ‘रोहन बीटा प्लीज रुक जाओ यह गलत है.’ पर वह नहीं मंटा मणिपुलटीवे हसी के साथ बोलता है ‘गलत? तू तोह टीचर की गांड मरवाती रही केबिन में अब मेरी बारी है. वीडियो मेरे पास है याद रख.’ फिर एक ज़ोर की धक्का की आवाज़ आती है जैसे वह माँ को ज़बरदस्ती बीएड पर गिरा रहा हो. माँ की चीख निकलती है ‘अहह दर्द हो रहा है!’ बीएड के स्प्रिंग्स चीखने लगते हैं थप थप की शुरुआत होती है.मैं थोड़ा सा दरवाज़ा खोल कर झांकता हूँ अँधेरा कमरा सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रही है. रोहन माँ को बीएड पर पटक दिया है उसकी साड़ी का पल्लू इधर उधर ब्लाउज खुला हुआ. वह ज़ोर से माँ के हाथों को पकड़ कर ऊपर खींच देता है जैसे नॉन-कोनसेन्सुअल खेल खेल रहा हो. ‘साड़ी उतार खुद से वह हुकुम देता है पर माँ हिलती नहीं. तोह वह खुद हाथ डालता है साड़ी के अंचल को खींचता है पेटीकोट के नाड़े खोल देता है. माँ नंगी हो जाती है निचे से उसकी छूट दिखती है लाल और गीली पहले के चौड़ाई से. रोहन हसता है ‘देख कितनी रंडी बन गयी तू.’ वह ब्लाउज के बटन्स पहाड़ देता है ब्रा को इधर उधर सरकता है माँ के बड़े बूब्स बहार आ जाते हैं निप्पल्स सख्त हो चुके हैं डर से.रोहन झुकता है माँ के एक निप्पल को मुँह में भर लेता है ज़ोर ज़ोर से चूसने लगता है जैसे दूध निकाल रहा हो. ‘चूस चूस अह्ह्ह आंटी तेरे बूब्स कितने मुलायम हैं वह बोलता है दांत से काट ता है. माँ के मुँह से चीख निकलती है ‘आआह दर्द! मत करो!’ पर उसके आंसू गिर रहे हैं गाल पर टपकते हुए वह भोली माँ अब ब्लैकमेल की शिकार कुछ कर नहीं प् रही. रोहन दूसरे निप्पल पर हमला करता है चबाता है चूसता है स्लुर्प स्लुर्प की आवाज़ें कमरे में गूंज रही हैं. माँ का बदन हिल रहा है नॉन-कोनसेन्सुअल दर्द और शायद थोड़ी सी गर्मी से उसकी सांसें तेज़ हो गयी हैं. रोहन का हाथ निचे जाता है माँ की छूट में ऊँगली डालता है ‘गीली हो गयी न? अब असली मज़ा.’ माँ रोटी है ‘नहीं प्लीज बीटा यहाँ है घर में पर वह सुनता नहीं मैनीपुलेशन से उससे दबोच लिया है.मैं बहार खड़ा सांस रोक कर देख रहा हूँ मेरा लुंड पंत में तन गया है सख्त और दर्द कर रहा है. यह इन्सेस्ट जैसा लग रहा है मेरी माँ को मेरा दोस्त छोड़ रहा है और मैं एक्ससिटेड हो रहा हूँ. दिल टूट रहा है माँ की आँखें बंद हैं आंसू बह रहे हैं वह भोली औरत जो हमेशा मेरा ख्याल रखती थी अब यह हाल. पर मैं हैट नहीं प् रहा वोयर बन कर सब देख रहा हूँ हाथ अपने लुंड पर जाता है खुद बा खुद रगड़ने लगता हूँ.अंदर रोहन उठता है अपना पंत पूरा नीचे सरकता है उसका मोटा लुंड बहार निकल आता है लाल सर और मोटा पहले से ही गीला. ‘ले आंटी यह ले अपनी छूट में वह बोलता है माँ की टांगें पकड़ कर फैला देता है बीएड पर चढ़ जाता है. माँ मन करती है ‘नहीं रोहन इतना मोटा नहीं जायेगा पर वह ज़बरदस्ती अपना लुंड माँ की छूट के मुँह पर रगड़ता है गीली कर लेता है. फिर एक ज़ोर के झटके से घुसा देता है पूरा मोटा लुंड अंदर ‘अह्ह्ह्ह कितनी टाइट है तेरी छूट अंकल और टीचर ने फिर भी मज़बूत है!’ माँ की चीख गूंजती है ‘आआह! पहात गयी मैं!’ उसकी छूट के होंठ फ़ैल जाते हैं लुंड अंदर बहार होने लगता है ठोकने की आवाज़ तेज़ फचक फचक.रोहन तेज़ी से ठोकता है हर धक्के में माँ का बदन उछाल जाता है बूब्स हिलते हैं निप्पल्स अभी भी लाल चूसने से. ‘ले ले रंडी तेरी छूट मेरा लुंड खा रही है वह हँसता है हाथों से माँ की गांड पकड़ कर और अंदर धकेल देता है. माँ के मुँह से सिसकियाँ निकल रही हैं ‘उठ उठ बस करो पर उसका बदन मणिपुलटे हो रहा है छूट गीली आवाज़ें बना रही है. रोहन की सांसें तेज़ पसीना टपक रहा है वह माँ के ऊपर झुका मुँह में जीभ दाल देता है किश करते हुए छोड़ता रहता है. ‘तू मेरी है अब रोज़ आऊंगा ब्लैकमेल से नहीं तेरी मर्ज़ी से छोडूंगा.’ माँ रो रही है पर जवाब नहीं देती सिर्फ हांफ रही है.मैं बहार इमोशनल हो चूका हूँ आंसू आ रहे हैं आँखों में पर लुंड इतना खड़ा है की दर्द हो रहा. माँ की चुदाई देख कर दिल टूट रहा है यह नॉन-कोनसेन्सुअल ज़बरदस्ती मेरा दोस्त उससे मणिपुलटे कर रहा है और मैं कुछ कर नहीं प् रहा. पर एक्ससिटेमेंट भी है वोयूरिस्म ने मुझे पकड़ लिया है. अंदर ठोकने की स्पीड बढ़ जाती है रोहन चिल्लाता है ‘आ रहा हूँ अंदर ही भर दूंगा!’ माँ चिल्लाती है ‘नहीं बहार!’ पर वह सुनता नहीं ज़ोर के धक्के मारता है फिर एक लम्बी सिसकारी के साथ छुम कर देता है मोटा लुंड फड़क-ता हुआ गरम माल माँ की छूट में उगल देता है टपक टपक बहार निकल आता है.रोहन थक कर गिर जाता है माँ के ऊपर लुंड अभी भी अंदर हांफ रहा है. माँ की आँखें खुली हैं आंसू बह रहे हैं वह चुप है. मैं वापस छुप जाता हूँ दिल की धड़कन रुक नहीं रही. रोहन उठेगा तोह क्या होगा? कल स्कूल में क्या? यह सब ख़तम नहीं हुआ शायद और ब्लैकमेल आएगा और मैं? मैं बेवक़ूफ़ सा खड़ा हूँ सोच रहा हूँ की अंदर जाऊं या न.

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