रीता एक 38 वर्षीय आकर्षक महिला थी, जिसकी काया अभी भी जवानी की चमक लिए हुए थी। उसके लंबे काले बाल, गोरी त्वचा और भरी हुई छाती-कमर उसे हर जगह नजरों का केंद्र बनाती। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थी, जहां उसका बॉस मिस्टर शर्मा एक 45 वर्षीय दबंग और आकर्षक व्यक्ति था। शर्मा साहब लंबे कद-काठी वाले, मांसल शरीर के मालिक थे, जिनकी आंखों में हमेशा एक भूखी चमक रहती। रीता की शादी हो चुकी थी, लेकिन उसके पति एक साधारण क्लर्क थे जो घर पर ही रहते और कभी-कभी नशे की लत में डूब जाते। उनका बेटा राहुल 18 साल का कॉलेज स्टूडेंट था, जो अपनी मां से बहुत प्यार करता था और उसे एक आदर्श महिला मानता था।
कंपनी का एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस मुंबई में होने वाला था। शर्मा साहब ने रीता को अपने साथ ले जाने का फैसला किया, बहाना बनाया कि उसे कॉन्फ्रेंस में सहायता की जरूरत है। रीता को थोड़ा संकोच हुआ, लेकिन नौकरी की मजबूरी में वह मान गई। राहुल को पता चला तो वह चिंतित हो गया। ‘मां, मैं भी चलूं? पापा तो घर पर अकेले रहेंगे।’ लेकिन रीता ने हंसकर टाल दिया, ‘बेटा, तू पढ़ाई पर ध्यान दे। सब ठीक रहेगा।’
ट्रेन से मुंबई पहुंचने के बाद वे एक लग्जरी होटल में रुके। शर्मा साहब ने एक डबल रूम बुक किया था, कहते हुए कि सिंगल रूम्स महंगे हैं। रीता को अजीब लगा, लेकिन वह चुप रही। शाम को कॉन्फ्रेंस के बाद वे रूम में लौटे। शर्मा साहब ने व्हिस्की की बोतल निकाली और रीता को एक ग्लास थमाया। ‘रीता जी, आज की सफलता का जश्न मनाते हैं। आपने तो कमाल कर दिया।’ रीता ने शरमाते हुए ग्लास ले लिया। धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। शर्मा साहब की नजरें रीता की साड़ी के ब्लाउज पर टिक गईं, जहां से उसके स्तनों की गोलाई झांक रही थी।
‘रीता, आप जानती हैं न, आप कितनी खूबसूरत हैं। घर पर वो बेवकूफ पति आपकी कद्र नहीं करता।’ शर्मा साहब ने करीब आते हुए कहा। रीता का चेहरा लाल हो गया। ‘सर, ये क्या कह रहे हैं। मैं शादीशुदा हूं।’ लेकिन शर्मा साहब ने हंसकर उसके कंधे पर हाथ रख दिया। ‘शादीशुदा तो मैं भी हूं, लेकिन जिंदगी में मजा तो लेना पड़ता है।’ उनकी उंगलियां रीता की गर्दन पर सरकने लगीं। रीता का शरीर सिहर उठा। लंबे समय से उसके पति ने उसे स्पर्श नहीं किया था। शराब का नशा भी चढ़ रहा था।
शर्मा साहब ने रीता को अपनी गोद में खींच लिया। उनके होंठ रीता के होंठों से चिपक गए। रीता ने पहले तो विरोध किया, लेकिन फिर जवाब दे दी। उनकी जीभें आपस में लिपट गईं। शर्मा साहब के हाथ रीता की साड़ी के आंचल को सरका रहे थे। उन्होंने ब्लाउज के हुक खोल दिए और रीता के भारी स्तनों को बाहर निकाल लिया। ‘वाह, क्या माल है!’ उन्होंने कहा और एक निप्पल को मुंह में भर लिया। रीता की सांसें तेज हो गईं। ‘आह… सर… मत… ‘ लेकिन उसकी आवाज में विनती कम और उत्तेजना ज्यादा थी।
इधर, राहुल घर पर बेचैन था। पिता नशे में सो चुके थे। राहुल को लगा कि मां से बात कर ले। उसने फोन किया, लेकिन रीता का फोन व्यस्त था। चिंता बढ़ गई। आखिरकार, राहुल ने फैसला किया कि वह मुंबई चला जाए। रात की ट्रेन पकड़कर वह सुबह होटल पहुंच गया। रिसेप्शन पर उसने मां का नाम लिया। ‘रीता शर्मा? हां, सर के साथ डबल रूम में हैं।’ क्लर्क ने कहा। राहुल का दिल धक से रह गया। ‘डबल रूम? लेकिन मां तो अकेली आई थीं।’ उसने सोचा और सीधा कमरे की ओर बढ़ गया।
राहुल ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब नहीं आया। दरवाजा थोड़ा खुला था। राहुल ने धीरे से झांका। जो दृश्य उसके सामने आया, वह उसके होश उड़ा देने वाला था। कमरे के बीच में बड़ा बेड था, जहां उसकी मां रीता नंगी लेटी हुई थी। उसके ऊपर शर्मा साहब भी पूरी तरह नग्न थे। शर्मा साहब का मोटा, लंबा लंड रीता की चूत में पूरी तरह धंसा हुआ था। वे जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। रीता की टांगें शर्मा साहब की कमर से लिपटी हुईं थीं, और उसके मुंह से कराहें निकल रही थीं। ‘आह… हां सर… जोर से… चोदो मुझे…’
राहुल की आंखें फैल गईं। वह स्तब्ध खड़ा हो गया। उसकी मां, जो हमेशा साड़ी में संजीदा रहती, अब एक अजनबी पुरुष के नीचे कराह रही थी। शर्मा साहब के लंड के हर धक्के से रीता का शरीर उछल रहा था। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, और शर्मा साहब उन्हें मुट्ठी में पकड़कर दबा रहे थे। ‘रीता, तेरी चूत कितनी टाइट है! तेरे पति ने तो इसे बर्बाद कर दिया होगा।’ शर्मा साहब हांफते हुए बोले। रीता ने जवाब दिया, ‘नहीं सर… वो तो कभी छूता भी नहीं… तुम्हारा लंड इतना बड़ा है… आह… मुझे मरवा दो।’
राहुल का मन में तूफान उठ रहा था। वह भागना चाहता था, लेकिन पैर जमे हुए थे। उसकी नजरें मां की चूत पर टिक गईं, जहां शर्मा साहब का लंड अंदर-बाहर हो रहा था। चूत के होंठ लाल हो चुके थे, और वहां से रस टपक रहा था। शर्मा साहब ने रीता को पलट दिया। अब रीता कुत्ते की तरह घुटनों पर थी, और शर्मा साहब पीछे से उसके गांड पर थप्पड़ मारते हुए लंड ठोक रहे थे। ‘ले साली… तेरी गांड भी मस्त है।’ रीता चीखी, ‘हां… मारो… चोदो मेरी गांड भी।’ शर्मा साहब ने थूक लगाकर लंड को रीता के गांड के छेद पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाल दिया। रीता दर्द से सिकुड़ी, लेकिन फिर आनंद में डूब गई।
राहुल की सांसें रुक सी गईं। वह कभी कल्पना भी न कर सका था कि उसकी मां ऐसी हो। लेकिन अजीब सी उत्तेजना भी महसूस हो रही थी। उसका लंड उसके पैंट में खड़ा हो गया। वह चुपचाप देखता रहा। शर्मा साहब अब तेजी से गांड मार रहे थे। रीता के बाल बिखर गए थे, पसीना उसके शरीर पर चमक रहा था। ‘आह… सर… मैं झड़ने वाली हूं… ‘ रीता चिल्लाई। शर्मा साहब ने और जोर लगाया। ‘मैं भी… ले मेरी रंडी… ‘ और उन्होंने अपना माल रीता की गांड में उंडेल दिया। रीता का शरीर कांप उठा, उसकी चूत से रस बहने लगा।
वे दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। शर्मा साहब रीता को चूमने लगे। ‘रीता, कल फिर कॉन्फ्रेंस के बाद यही करेंगे। तू मेरी हो गई।’ रीता मुस्कुराई, ‘हां सर, जो कहें।’ राहुल अब और न देख सका। वह चुपचाप पीछे हट गया और लॉबी में चला गया। उसके मन में सवालों का सैलाब था। मां को क्या हुआ? लेकिन साथ ही, वह दृश्य उसके दिमाग में घूम रहा था।
अगले दिन कॉन्फ्रेंस में रीता और शर्मा साहब साथ थे। रीता की चाल में एक नई चमक थी। राहुल ने होटल में ही इंतजार किया। शाम को जब वे लौटे, राहुल ने दरवाजा खटखटाया। रीता ने खोला तो चौंक गई। ‘राहुल? तू यहां?’ राहुल ने गुस्से से कहा, ‘मां, मैं सब देख लिया।’ रीता का चेहरा सफेद पड़ गया। शर्मा साहब अंदर से आए। ‘क्या हुआ?’ रीता ने रोते हुए कहा, ‘बेटा, ये… ये मजबूरी थी।’
राहुल ने चिल्लाया, ‘मजबूरी? तुम्हें उसके नीचे कराहते देखा मैंने!’ शर्मा साहब हंस पड़े। ‘बेटा, तेरी मां अब मेरी है। तू भी आ जा, मजा ले।’ राहुल घबरा गया। लेकिन रीता ने उसे अंदर खींच लिया। ‘राहुल, चुप रह। ये हमारा राज है।’ धीरे-धीरे, बातें हुईं। रीता ने बताया कि पिता की लत ने घर बर्बाद कर दिया है, और शर्मा साहब प्रमोशन देंगे। राहुल को समझ आ गया। रात को, जब शर्मा साहब फिर रीता को चोदने लगे, राहुल ने दरवाजे से झांका। इस बार, वह सिर्फ देखने ही नहीं, बल्कि खुद को छूने लगा।
धीरे-धीरे, कहानी ने नया मोड़ लिया। शर्मा साहब ने रीता को और गहराई में डुबो दिया। वे हर रात होटल में नंगे लेटे, एक-दूसरे को चाटते, चूसते। शर्मा साहब रीता की चूत को जीभ से सहलाते, उसके क्लिटोरिस को चूसते जब तक वह चीख न उठे। रीता बदले में शर्मा साहब के लंड को मुंह में लेकर चूसती, गले तक ले जाती। ‘सर, आपका लंड इतना स्वादिष्ट है।’ एक बार तो उन्होंने थ्रीसम की कोशिश की, लेकिन राहुल भाग गया। लेकिन अंत में, रीता ने घर लौटकर भी शर्मा साहब से चक्कर जारी रखा। राहुल ने चुप रहना चुना, लेकिन उसके सपनों में वह दृश्य बार-बार आता।
कहानी का अंत खुशहाल नहीं था, लेकिन वास्तविक। रीता को प्रमोशन मिला, घर की हालत सुधरी, लेकिन परिवार का बंधन ढीला पड़ गया। राहुल ने कभी मां से सीधे बात नहीं की, लेकिन गुप्त रूप से वह अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाया। होटल का वो कमरा उनके जीवन का एक गुप्त अध्याय बन गया।
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