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Dost ki Maa ko choda

यह दोस्त की माँ की चूत मारी वाली बात दो साल पुरानी उस वक्त की है जब हमारी कंपनी में एक लड़का काम पर लगा था,
उसका नाम सूरज था,

एक महीने में हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई,
उसका घर मुझे मेरे घर के रास्ते में पड़ता था तो मैं उसे उसके घर ड्रॉप कर दिया करता था,

एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुलाया,
मैं भी चला गया,

उसके घर में उसका छोटा भाई था जो अभी छोटा था, उसकी बहन एकदम जवान थी,
उसकी चूचियां एकदम मस्त और बड़ी बड़ी थीं, कमर लचीली और गांड एकदम उठी हुई थी,

उसका गोरा बदन देखकर मैं एकदम से गनगना गया,
सच कह रहा हूँ दोस्तो, उसे देख कर तो किसी के भी लंड से पानी निकल जाए,

तभी दोस्त ने मुझे टोका और वह अपनी मां से परिचय करवाने लगा,

मेरी नजर उसकी बहन से हट कर उसकी मां पर गई,
मैंने उन्हें नमस्ते की और देखा, वे करीब 40 साल की रही होंगी,

उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी और वे भी गजब का कांटा लग रही थीं,
फिर वे मुझे बैठने की कह कर चाय बनाने किचन में चली गईं,
हम दोनों दोस्त बातें करने लगे,

जब दोस्त की मम्मी चाय लेकर आईं तो वे मुस्कुरा कर बोलीं- मेरा बेटा अच्छे से काम करता है ना!
मैंने हां में जवाब दिया,

मैं दोस्त की मां की जवानी को नजरों से चोदने लगा था,

उनके बारे में बताऊं, तो उनका रंग एकदम गोरा, मस्त फिगर, बड़ी गांड सी बड़े बड़े दूध थे,
वे मुझसे हंस हंस कर बातें कर रही थीं तो ऐसा लग रहा था मानो दोस्त की मम्मी मुझे देने को एकदम राजी हों,

कुछ देर बाद दोस्त किसी काम से उठ कर अन्दर वाले कमरे में चला गया,
उस समय आंटी ने मेरी जांघ पर हाथ रख कर दबाते हुए कहा- तुम मेरे बेटे का सही से ख्याल रखना, यह अभी नादान है, इसके पापा आठ साल पहले ही हम सब को छोड़ कर चले गए थे,

अब मेरी समझ में यह नहीं आ रहा था कि दोस्त के पापा इस दुनिया से चले गए थे या घर छोड़ कर कहीं चले गए थे!

उधर आंटी ने अपने बालों में सिंदूर भी नहीं लगाया हुआ था तो मैं समझ गया कि शायद मामला विधवा वाला है,

खैर … आंटी का हाथ मेरी जांघ पर मुझे बड़ा सुखद लग रहा था और लंड के उभार ने आंटी की नजरों में चमक ला दी थी जो मैंने समझ ली थी कि आंटी भूखी हैं!

मैंने अपने घर जाकर आंटी को याद करके 3 बार मुठ मारी,
कुछ दिनों बाद जब मेरे दोस्त ने दो तीन दिन की छुट्टी मारी तो मैं उससे मिलने उसके घर गया,

उसकी मम्मी ने दरवाजा खोला, तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं,
वे बाथरूम से नहाकर निकली थीं, उनके बाल पूरी तरह से भीगे हुए थे,
बालों से पानी चुह कर उनके मम्मों में जा रहा था,

उन्होंने बड़े गले वाली मैक्सी पहनी हुई थी, जिसमें से उनके आधे से ज्यादा दूध साफ दिख रहे थे और बचा खुचा जलवा उनके गीले बालों से बह रहे पानी ने दिखवा दिया था,
मैक्सी गीली हो गई थी और दूध के निप्पल अपने उभारों के साथ साफ साफ नुमाया हो रहे थे,

मेरी नजरें तो आंटी के मम्मों पर जम कर रह गई थीं,
उन्होंने मुझे अपने चूचे देखते हुए देखा तो वे लहरा कर बोलीं- अन्दर आओ न!

मैंने दरवाजे से ही पूछा- सूरज जॉब पर नहीं आया, वह कहां है?
उन्होंने कहा- वह गांव गया है, तुम अन्दर आओ न, मैं तुम्हारे लिए ताजे दूध की चाय बनाती हूँ,

आंटी ने जब यह कहा कि ताजे दूध की चाय बनाती हूँ और अन्दर आने का बोला, तो मेरा लंड तो पूरा खड़ा हो गया,

तभी मैंने कह दिया कि आंटी ताजे दूध की चाय का मतलब नहीं समझा!

आंटी हंस दीं और बोलीं- अरे दूध वाला अभी दूध देकर गया है न! उसके बाद ही तो मैं नहाने गई थी, आज मैं घर में अकेली हूँ, इसलिए आने जाने वालों के हिसाब से काम करना पड़ता है!

मैं उनसे और भी कुछ पूछना चाहता था, पर मैंने उस वक्त चुप रह कर पहले आंटी का रुझान देखना सही समझा,

फिर वे चाय लेकर आईं और झुक कर चाय देने लगीं,
मेरा तो सीन देख कर कलेजा मुँह में आने को हो गया था,

साला आंटी के मम्मों ने तो मेरे लौड़े का काम उठा दिया था, उसमें से पानी रिसने लगा था,

आंटी मेरे सामने अपने कप लेकर बैठ गईं और मुझसे बात करने लगीं,
मेरी नज़र तो आंटी के मम्मों से हट ही नहीं रही थी,

उन्होंने शायद मेरी नजरों की कामुकता को ताड़ लिया था तो मुस्कुरा दीं,
फिर कातिल मुस्कान देते हुए आंटी ने मुझसे पूछा- जीएफ है या नहीं तुम्हारी?

मैंने ना में जवाब दिया, तो उन्होंने झट से मुस्कुराते हुए कहा- अरे … क्या बात करते हो … तुम तो इतने खूबसूरत हो फिर भी जीएफ नहीं बनाई?
मैंने कहा- कोई मिली ही नहीं!
‘ओह ओक!’

फिर कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे कहा- मैंने कुछ साड़ी ली हैं, उनमें से कौन सी अच्छी है, क्या तुम मुझे बता पाओगे?
मैंने हां में जवाब दिया,

वे बोलीं- चलो बेडरूम में!
आंटी के मुँह से बेडरूम शब्द सुन कर मेरा तो लंड पूरा खड़ा हो चुका था!

फिर मैं उनके साथ बेडरूम में जाने लगा,
आंटी की गांड गजब मटक रही थी,
ऐसा लग रहा था मानो आज वे अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही मटका रही हों!

बेडरूम में आने के बाद उन्होंने साड़ी दिखाई और बोलीं- मैं पहन कर दिखाती हूँ, तुम मुझे बताना कि कौन सी अच्छी लग रही है,
मैंने हां कहा और बोला- मैं बाहर रुकता हूँ आंटी, आप पहन कर आ जाना!

आंटी ने कहा- अरे यहीं रूको न … तुम तो मेरे बेटे जैसे हो, मुझसे क्या शर्माना है!
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और कमरे में ही रुक गया,

आंटी ने मैक्सी पहनी हुई थी और तब उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी,
उन्होंने मुझे पीछे घूम जाने को कहा, मैं घूम गया,

उनके बेडरूम में मिरर लगा हुआ था, जिसमें से मैं उन्हें साफ देख सकता था,
जब आंटी ने मैक्सी निकाली तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं, लंड आउट ऑफ कंट्रोल हो गया,

मुझे उनकी पूरी गांड और नंगी पीठ साफ साफ दिखाई दे रही थी,
उन्होंने जल्दी से साड़ी पहनी और बोलीं- देखो, कैसी दिख रही हूँ!

मैंने घूम कर देखा तो वे तो उस लाल साड़ी में पूरी एटम बम दिख रही थीं,
उन्होंने सिर्फ साड़ी लपेटी हुई थी, साड़ी के नीचे सिर्फ चड्डी थी, यह मैं देख चुका था,

मैंने उनकी नंगी चूचियों की कल्पना करते हुए जवाब दिया- लाजवाब, बहुत खूबसूरत दिख रही हो आप!
उन्होंने वासना भरी आवाज में कहा- और अन्दर से मैं कैसी दिख रही थी?

यह सुनकर मैं डर गया और हकला कर बोला- क,,क्या!
उन्होंने कहा- मिरर में तो बड़ी प्यार वाली नजरों से देख रहे थे तुम!

मैं हिचकिचा कर बोला- सॉरी आंटी!
उन्होंने कहा- कोई बात नहीं, तुम तो मेरे बेटे के जैसे हो, खुल कर बोलो न!

मैंने कहा- आप अन्दर से भी बहुत अच्छी दिखती हो!
तो उसने कहा- देखागे मुझे अन्दर से?

मुझे अजीब सा लग रहा था और मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था,

मैंने अपने सूखे होंठों पर जुबान फेरते हुए और थूक गुटकते हुए कहा- हां क्यों नहीं!
जैसे ही मैंने हां में जवाब दिया, आंटी ने एक झटके में अपनी साड़ी उतार दी,

ओह क्या शानदार नज़ारा था!
मेरे सामने आंटी सिर्फ़ पैंटी और ब्रा में थीं,
उनका पूरा गोरा बदन और मलाई सी जांघें मुझे पागल बना रही थीं,

फिर वे पीछे मुड़कर मुझे अपनी नंगी पीठ दिखाती हुई खुजलाने के लिए बोलीं,

मेरा बड़ा लंड पूरा टाइट था, पैंट में साफ दिखाई दे रहा था,
मैं खड़ा रहने में शर्मा रहा था,

वे वापस से बोलीं- करो न!
मुझे समझ में आया कि आंटी चुदाई करने के लिए कह रही हैं कि पीछे से करो न!

वे अभी भी अपनी गांड दिखाती हुई खड़ी थीं,
मैं उनके करीब हो गया और उनकी पीठ पर हाथ रख कर सहलाने लगा,

मेरा कड़क लंड उनकी गांड से रगड़ खाने लगा था,
तभी आंटी की नज़र मेरे लंड पर गई और वे बोलीं- यह क्या है?

मैं शर्म के मारे पागल हो रहा था,
उन्होंने कहा- ठीक है, मैं ही देख लेती हूँ कि तुमने क्या छुपा रखा है!

मेरा लंड अब आंटी के हाथ में आ गया था,
उन्होंने लंड को मसलते हुए कहा- तुम्हारा लंड तो काफ़ी बड़ा है!

आंटी के मुँह से ऐसी बात सुन कर मैं दंग रह गया,
उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में भरते हुए कहा- मुझे नहीं दिखाओगे?

मैं शर्मा रहा था,
उन्होंने कहा- तुम मेरे बेटे जैसे हो!

मैं कुछ नहीं बोला और चुपचाप खड़ा सोचता रहा कि क्या इसका बेटा भी इसकी लेता है, जो साली बार बार कर रही है कि तुम तो मेरे बेटे जैसे हो?

तभी आंटी ने मेरी पैंट के बटन को खोला और उसको नीचे सरकाते हुए कहा- इतना बड़ा तो सूरज के पापा की भी नहीं था!

मेरा लंड अब आंटी के कब्जे में था,
उन्होंने धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाना चालू कर दिया और वासना से उनका चेहरा टमाटर जैसे लाल हो गया था,

अब वह मूड में आ गईं और घुटनों के बल नीचे बैठ कर मेरे लंड को सहलाने लगी थीं,
आह मेरा तो हाल पूरा खराब हो चुका था,

मैंने आंखें बंद रखी थीं, तभी मुझे अपने लौड़े पर गीला गीला सा लगा तो मैंने अपनी आंखें खोल दीं,
आंटी मेरा लंड अपनी जीभ से चाटने लगी थीं,

मैंने उनकी आंखों में झाँका तो वे बोलीं- चोदोगे मुझे?
तो मैंने कुछ नहीं कहा,

वे मस्ती से लंड चाट रही थीं और उसे अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया था,
मैं बेहद गर्म हो गया था और मेरा लंड फटने को था,

आंटी मेरे गोटों को सहलाती हुई लंड चूस रही थीं और वे बीच बीच में मेरी आंखों में अपनी आंखें डाल कर वासना भरी नजरों से मुझे नशा दे रही थीं,

सच में उस वक्त जैसा नशा मैंने अपनी जिंदगी में आज पहली बार किया था,

जैसे ही कुछ मिनट तक लंड चुसाई का कार्यक्रम हुआ, मेरे लंड ने हार मान ली और उसका सारा पानी आंटी के मुँह में चला गया,
उन्होंने इतने पर भी लंड को अपने मुँह से नहीं निकाला था; न ही वे लंड छोड़ने के मूड में दिख रही थीं,

उन्होंने पूरे लौड़े को चाट चाट कर दुबारा से उसे कड़क कर दिया और मुझे बेड पर गिरा दिया,
उसके बाद आंटी ने अपनी पैंटी निकाल कर अपनी चूत मेरे मुँह की तरफ कर दी यानि वे 69 में हो गईं,

आंटी लंड चाटने लगीं तो मैंने भी उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया,
वे ज़ोर ज़ोर से अपनी गांड हिला रही थीं मुझे चिपचिपा सा लगने लगा था, शायद आंटी की चूत झड़ गई थी,

मैं फिर भी आंटी की चूत को चाटता रहा, मेरा लंड फिर से एकदम टाइट हो गया था,
अब वह सीधी होकर मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ने लगीं और मुझे पागलों के जैसे किस किए जा रही थीं,

जैसे ही मेरे लंड का टोपा, उनकी चूत में घुसा, उनके मुँह से तेज आवाज़ निकली ‘आह उफ्फ़ आहह मर गई,’

जबकि अभी मेरा लंड पूरा नहीं घुसा था मगर तब भी वे दर्द से कराह रही थीं,

कुछ देर बाद आंटी ऊपर से ही मज़े लेने लगी थीं,
मैंने भी एक जोरदार झटका दे दिया,

वे बस ‘आह आह’ की आवाज़ निकाले जा रही थीं,
अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में जा चुका था,
मैंने भी बिना रुके धकापेल मचा दी,

बीस मिनट तक दमदार चुदाई के दौरान आंटी सिर्फ अपनी गांड हिलाए जा रही थीं,
दोस्त की माँ की चूत मारी और तभी मेरा पानी निकल गया और हम दोनों बेड पर ही गिर गए,

थोड़ी देर बाद मैं उठा और मैंने कहा- आंटी अब मैं जाता हूँ!
उन्होंने कहा- रूको थोड़ा … और मुझे प्लीज आंटी मत बुलाओ, तुम मुझे नाम से बुलाओ!

आंटी का नाम प्रिया था,
उन्होंने मुझे फिर से किस करना शुरू कर दिया और बोलीं- दुबारा नहीं चोदोगे मुझे?

मैं अब एकदम खुल चुका था, तो मैंने कहा कि हां क्यों नहीं डार्लिंग … पर मुझे इस बार तुम्हारी गांड मारनी है!
आंटी ने आंखें बड़ी की और बोलीं- इतना बड़ा लंड गांड में घुसा, तो फट जाएगी!

मैंने ज़िद की और उन्हें उलटा करके उनकी गांड पर लंड रख दिया,

मैंने कुछ ही देर में आंटी की गांड में लंड घुसेड़ दिया,
आंटी डॉगी स्टाइल में थीं तो लंड सही से अन्दर नहीं जा पा रहा था,

उन्होंने कहा- थोड़ा तेल लगा लो,
मैंने तेल लगाया और दुबारा से लौड़े को गांड में पेल दिया,

मैंने उस दिन आंटी की सच में गांड फाड़ दी थी,

अपने जीवन में मैं वह दिन कभी नहीं भूल सकता,

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